सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ से बाहर रहने की शर्त पर दी राहत और ईडी से पूछा कब तक चलेगी जांच
रायपुर (ए) छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री कवासी लखमा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। पिछले 379 दिनों से रायपुर की सेंट्रल जेल में बंद लखमा की अंतरिम जमानत मंजूर कर ली गई है। प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी और ईओडब्ल्यू द्वारा दर्ज मामलों में आज शाम तक उनकी रिहाई संभव है। हालांकि कोर्ट ने उनकी रिहाई के साथ कुछ कड़ी शर्तें भी रखी हैं जिनका पालन करना अनिवार्य होगा।
सुप्रीम कोर्ट की शर्तें और पाबंदियां
कवासी लखमा को जमानत देते हुए सर्वोच्च अदालत ने स्पष्ट किया है कि रिहाई के बाद वे छत्तीसगढ़ में नहीं रह पाएंगे। उन्हें राज्य की सीमा से बाहर रहना होगा और केवल अदालती पेशी के दौरान ही छत्तीसगढ़ आने की अनुमति होगी। इसके साथ ही उन्हें अपना पासपोर्ट जमा करना होगा और अपना वर्तमान पता तथा मोबाइल नंबर संबंधित पुलिस थाने को देना होगा ताकि उनकी लोकेशन ट्रैक की जा सके।
ईडी की जांच पर अदालत की नाराजगी
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल खड़े किए। कोर्ट ने ईडी से पूछा कि आखिर यह जांच कब तक चलेगी और इसे पूरा करने के लिए और कितना समय चाहिए। अदालत ने जांच अधिकारी को अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है जिसमें यह बताना होगा कि पूर्व मंत्री के खिलाफ वर्तमान में कौन सी जांच लंबित है।
लखमा पर लगे गंभीर आरोप
ईडी के आरोपों के मुताबिक कवासी लखमा उस शराब सिंडिकेट के अहम हिस्सा थे जिसने सरकारी खजाने को भारी नुकसान पहुँचाया। एजेंसी का दावा है कि लखमा को हर महीने 2 करोड़ रुपये का कमीशन मिलता था और 3 साल के दौरान उन्हें कुल 72 करोड़ रुपये दिए गए। इन पैसों का इस्तेमाल उनके बेटे के घर के निर्माण और पार्टी भवन के निर्माण में किए जाने का आरोप भी लगाया गया है।
कैसे हुआ करोड़ों का शराब घोटाला
जांच एजेंसियों के अनुसार इस घोटाले को तीन अलग-अलग तरीकों से अंजाम दिया गया था। पहले स्तर पर डिस्टलरी संचालकों से प्रति पेटी कमीशन लिया गया। दूसरे स्तर पर सरकारी दुकानों में नकली होलोग्राम वाली शराब बिकवाई गई जिससे मिला पैसा सीधे सिंडिकेट की जेब में गया। तीसरे स्तर पर शराब सप्लाई के जोन तय करने के लिए अवैध वसूली की गई। इस पूरे मामले में 2100 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध कमाई का दावा किया गया है।