47 साल से बातचीत टालता रहा तेहरान; परमाणु विवाद के बीच पश्चिम एशिया में बढ़ी अमेरिकी सैन्य हलचल
अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने ईरान को लेकर अब तक का सबसे सख्त बयान दिया है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में ईरान के लिए सत्ता परिवर्तन ही बेहतर रास्ता हो सकता है। ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है, जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच परमाणु कार्यक्रम को लेकर कूटनीतिक कोशिशें फिर से तेज हो रही हैं।
वॉशिंगटन (ए)। ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी राजनीति में नई बहस छिड़ गई है। डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को स्पष्ट शब्दों में कहा कि पिछले 47 वर्षों से तेहरान केवल समय खरीदने की रणनीति अपनाता रहा है। उनका आरोप है कि बातचीत के नाम पर टालमटोल की नीति से क्षेत्रीय अस्थिरता और जनहानि बढ़ी है। उन्होंने कहा, “अब इस मसले को हमेशा के लिए सुलझाने का समय आ गया है।”
हालांकि ट्रंप ने यह नहीं बताया कि संभावित सत्ता परिवर्तन के बाद वे ईरान की कमान किसके हाथों में देखना चाहते हैं, लेकिन इतना जरूर कहा कि “कुछ लोग हैं, जिन पर विचार किया जा सकता है।”
खामेनेई को हटाना आसान नहीं
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि ईरान के सर्वोच्च नेता Ali Khamenei को सत्ता से हटाना अत्यंत जटिल प्रक्रिया होगी। विशेषज्ञों के अनुसार यह अभियान वेनेजुएला के राष्ट्रपति Nicolas Maduro के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय दबाव से भी अधिक कठिन साबित हो सकता है। सूत्रों का कहना है कि ट्रंप ने अभी तक इस दिशा में कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है, लेकिन उनका बयान स्पष्ट संकेत देता है कि वे कड़े विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
पश्चिम एशिया में बढ़ी सैन्य सक्रियता
इधर, अमेरिका ने पश्चिम एशिया में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है। क्षेत्र में USS Abraham Lincoln Carrier Strike Group और आठ निर्देशित मिसाइल विध्वंसक पोतों की तैनाती की तैयारी की जा रही है। साथ ही USS Gerald R. Ford भी पश्चिम एशिया की ओर बढ़ रहा है। इन गतिविधियों से संभावित सैन्य विकल्पों की अटकलें तेज हो गई हैं।
परमाणु समझौते की गुंजाइश
सख्त बयानबाजी के बावजूद ट्रंप ने यह भी कहा कि वे पहले यह देखना चाहते हैं कि क्या ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कोई ठोस और व्यवहारिक समझौता संभव है। उनका कहना है कि यदि बातचीत यथार्थवादी शर्तों पर आगे बढ़ती है तो समाधान की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। दूसरी ओर, तेहरान की ओर से संकेत मिले हैं कि वार्ता तभी आगे बढ़ेगी, जब उस पर अत्यधिक दबाव या असंतुलित शर्तें न थोपी जाएं। ईरानी नेतृत्व के वरिष्ठ सलाहकारों का कहना है कि किसी भी समझौते में आपसी हितों और सम्मान का ध्यान रखा जाना चाहिए।
बढ़ता तनाव, टिकी निगाहें
कुल मिलाकर, ट्रंप के बयान ने अमेरिका–ईरान संबंधों में नई हलचल पैदा कर दी है। अब वैश्विक समुदाय की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या कूटनीति आगे बढ़ेगी या पश्चिम एशिया में तनाव और गहराएगा।