- फर्जी आईपीएस बनकर वीडियो कॉल, मनी लॉन्ड्रिंग केस में फंसाने की धमकी
- 12 दिनों में अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवाई रकम
- साइबर पुलिस ने 2 लाख रुपये होल्ड कर जांच शुरू की
रायगढ़ में बिजली विभाग के एक सेवानिवृत्त परिवेक्षक को ‘डिजिटल अरेस्ट’ का भय दिखाकर 36.97 लाख रुपये की ठगी कर ली गई। खुद को केंद्रीय एजेंसी का अधिकारी बताने वाले साइबर ठगों ने वीडियो कॉल के जरिए दबाव बनाते हुए रकम अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा ली। मामले में साइबर थाना ने अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
रायगढ़ । रायगढ़ जिले में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत पारेषण कंपनी से सेवानिवृत्त एक परिवेक्षक को ठगों ने डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर लाखों रुपये की चपत लगा दी। पीड़ित जनवरी 2022 में सेवा निवृत्त हुआ था।
फर्जी कॉल से शुरू हुआ खेल
14 जनवरी 2026 को पीड़ित के मोबाइल पर एक महिला का कॉल आया। उसने खुद को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया से जुड़ा अधिकारी बताते हुए कहा कि उसके पहचान पत्र का दुरुपयोग कर जियो कंपनी का मोबाइल नंबर लेकर आपराधिक गतिविधियां की जा रही हैं।
इसके बाद कॉल को कथित वरिष्ठ अधिकारियों और दिल्ली के बारह खंभा रोड थाने के नाम पर जुड़े फर्जी अधिकारियों से कनेक्ट किया गया। आरोपियों ने पीड़ित को मनी लॉन्ड्रिंग मामले में फंसाने और गिरफ्तारी की धमकी दी।
फर्जी आईपीएस बनकर वीडियो कॉल
ठगों ने वीडियो कॉल कर खुद को आईपीएस अधिकारी ‘नीरज ठाकुर’ बताया और डिजिटल अरेस्ट की प्रक्रिया का हवाला देकर जांच में सहयोग करने को कहा। इस दौरान पीड़ित से बैंक खातों, संपत्ति और वित्तीय लेन-देन की जानकारी ली गई।
ठगों ने यह विश्वास दिलाया कि जांच पूरी होने के बाद राशि लौटा दी जाएगी। डर और मानसिक दबाव में आकर पीड़ित ने 30 जनवरी से 11 फरवरी 2026 के बीच 36 लाख 97 हजार 117 रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर दिए।
परिजनों को बताने पर खुला राज
रकम ट्रांसफर करने के बाद पीड़ित काफी सहमा हुआ रहने लगा। परिजनों के पूछने पर उसने पूरी घटना बताई, तब जाकर ठगी का एहसास हुआ। इसके बाद साइबर थाना में शिकायत दर्ज कराई गई।
2 लाख रुपये होल्ड
साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए लगभग 2 लाख रुपये होल्ड कराए हैं। साइबर थाना प्रभारी ने कहा कि यदि शिकायत तुरंत की जाती या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क किया जाता, तो अधिक राशि रोकी जा सकती थी। मामले में बैंक खातों और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच जारी है।
पुलिस की चेतावनी
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने स्पष्ट किया कि पुलिस, सीबीआई, ईडी या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी मोबाइल या वीडियो कॉल के माध्यम से ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करती और न ही जांच के नाम पर पैसे ट्रांसफर करने को कहती है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि ऐसे किसी भी कॉल पर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें और तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या नजदीकी साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराएं।