- मंत्रालय में सहायक ग्रेड-3 पद दिलाने का दिया था भरोसा
- नौकरी न लगने पर NTPC में AE बनाने का नया झांसा
- ई-मेल से भेजा फर्जी नियुक्ति पत्र, जॉइनिंग टली तो हुआ शक
- मोबाइल और दस्तावेज जब्त, अन्य पीड़ितों की तलाश में पुलिस
छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में सरकारी नौकरी दिलाने के नाम पर 10 लाख रुपए की ठगी का मामला सामने आया है। मंत्रालय और बाद में NTPC में नियुक्ति का झांसा देकर पति-पत्नी ने एक युवक से अलग-अलग किस्तों में रकम वसूली। फर्जी जॉइनिंग लेटर सामने आने के बाद पीड़ित ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है।
दुर्ग-भिलाई क्षेत्र में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले एक दंपती को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। मामला पदमनाभपुर थाना क्षेत्र का है, जहां बोरीगारका निवासी रविकांत साहू की शिकायत पर कार्रवाई की गई।
पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पहले मंत्रालय में सहायक ग्रेड-3 पद पर नौकरी लगवाने का भरोसा दिलाया। इस नाम पर प्रिया देशमुख (36) और प्रशांत कुमार देशमुख (49) ने अलग-अलग किश्तों में रकम लेना शुरू किया। मंत्रालय में नियुक्ति नहीं होने पर दोनों ने नया झांसा देते हुए NTPC में असिस्टेंट इंजीनियर (AE) पद पर नियुक्ति दिलाने की बात कही।
फर्जी जॉइनिंग लेटर से हुआ खुलासा
आरोपियों ने कुल 10 लाख रुपए वसूल लिए। बाद में पीड़ित को ई-मेल के जरिए NTPC का कथित नियुक्ति पत्र भेजा गया। दस्तावेज देखने के बाद कुछ समय तक युवक को भरोसा रहा, लेकिन जब जॉइनिंग प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ी तो उसे शक हुआ। जांच में नियुक्ति पत्र पूरी तरह फर्जी निकला।
शिकायत के बाद गिरफ्तारी
मामले की शिकायत मिलने पर पदमनाभपुर थाना में अपराध दर्ज किया गया। जांच के दौरान पुलिस ने 28 फरवरी 2026 को प्रिया देशमुख और 1 मार्च 2026 को प्रशांत कुमार देशमुख को गिरफ्तार कर लिया। दोनों को न्यायालय में पेश करने के बाद न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है।
इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच जारी
पुलिस ने आरोपियों के पास से फर्जी नियुक्ति पत्र की ई-मेल प्रिंट कॉपी, मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेज जब्त किए हैं। मोबाइल और डिजिटल साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच की जा रही है। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कहीं अन्य लोगों से भी इसी तरह ठगी तो नहीं की गई।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सरकारी नौकरी के नाम पर किसी भी अनजान व्यक्ति को रकम देने से पहले संबंधित विभाग से जानकारी अवश्य लें और संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत पुलिस को दें।