जुलाई के बाद एल नीनो लौटने की आशंका, मार्च से मई के बीच सामान्य से अधिक गर्मी और हीटवेव वाले दिनों की संभावना
देश में इस साल गर्मी ने समय से पहले ही दस्तक दे दी है। कई राज्यों में मार्च की शुरुआत में ही तापमान 38 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। भारत मौसम विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि इस बार गर्मी सामान्य से अधिक पड़ सकती है और मार्च से ही कई इलाकों में हीटवेव की स्थिति बन सकती है।
नई दिल्ली (ए)। देश के कई हिस्सों में मार्च के पहले सप्ताह से ही तेज गर्मी का असर दिखाई देने लगा है। राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और ओडिशा समेत कई राज्यों में अधिकतम तापमान 35 से 38 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। महाराष्ट्र के अकोला में पारा 38.5 डिग्री तक पहुंच गया, जिससे लोगों को अभी से लू जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
भारत मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार आने वाले दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के कई इलाकों में तापमान सामान्य से 4 से 6 डिग्री तक अधिक रह सकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि गुजरात और आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में मार्च के दौरान ही असामान्य रूप से अधिक हीटवेव के दिन देखने को मिल सकते हैं।
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक मार्च से मई के बीच देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक गर्मी रहने की संभावना है। खासकर पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, गंगीय पश्चिम बंगाल, ओडिशा, छत्तीसगढ़, तेलंगाना, रायलसीमा, आंध्र प्रदेश, गुजरात और राजस्थान में हीटवेव का प्रभाव ज्यादा देखने को मिल सकता है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि ये क्षेत्र पहले से ही लू के प्रति संवेदनशील माने जाते हैं।
इस वर्ष फरवरी का महीना भी असामान्य रूप से गर्म रहा। भारत में 1901 के बाद यह पांचवां सबसे गर्म फरवरी दर्ज किया गया है। औसत तापमान सामान्य से लगभग एक डिग्री अधिक 21.7 डिग्री सेल्सियस रहा। खास बात यह रही कि पूरे महीने कहीं भी कोल्ड वेव या अत्यधिक ठंड की स्थिति नहीं बनी।
बारिश की कमी भी चिंता का विषय बनी हुई है। पिछले दो महीनों में देशभर में सामान्य से लगभग 60 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है। आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय मोहपात्रा के अनुसार फरवरी में वर्षा 2001 के बाद सबसे कम और 1901 के बाद तीसरे सबसे निचले स्तर पर रही। हालांकि इस दौरान नौ वेस्टर्न डिस्टरबेंस सक्रिय हुए, लेकिन इनमें से अधिकांश कमजोर रहे और पर्याप्त बारिश नहीं हो सकी।
15 फरवरी के बाद से दिन और रात के तापमान में तेजी से वृद्धि दर्ज की गई। गुजरात, राजस्थान और तटीय कर्नाटक के कई इलाकों में तापमान सामान्य से 5 से 8 डिग्री तक अधिक रहा और 30 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया गया।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार प्रशांत महासागर में बनने वाली मौसमी घटना ‘एल नीनो’ का भी आने वाले महीनों में असर देखने को मिल सकता है। यह स्थिति तब बनती है जब प्रशांत महासागर के भूमध्यरेखीय क्षेत्र में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से अधिक हो जाता है, जिससे वैश्विक स्तर पर हवाओं और वर्षा के पैटर्न में बदलाव आता है।
विश्व मौसम संगठन (डब्ल्यूएमओ) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक कमजोर ला नीना अब समाप्त होकर ईएनएसओ-न्यूट्रल स्थिति में बदल रहा है। मई-जून तक यह स्थिति बनी रहने की संभावना है, लेकिन जुलाई के बाद एल नीनो के विकसित होने की आशंका बढ़ सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एल नीनो की स्थिति बनने पर भारत में मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है और तापमान में भी बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है। डब्ल्यूएमओ के अनुसार मई से जुलाई के बीच 60 प्रतिशत संभावना ईएनएसओ-न्यूट्रल रहने की है, जबकि एल नीनो की संभावना धीरे-धीरे बढ़कर करीब 40 प्रतिशत तक पहुंच सकती है।
डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो के अनुसार 2023-24 का एल नीनो पिछले वर्षों के सबसे मजबूत एल नीनो में शामिल था, जिसकी वजह से 2024 में वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाएगी ताकि संभावित प्रभावों के लिए समय रहते तैयारी की जा सके।