- पिलर और सीढ़ियां तैयार, लेकिन मुख्य संरचना अधूरी
- ट्रैफिक के कारण दिन में बंद, रात में हो रहा निर्माण
- डीकेएस से अंबेडकर अस्पताल तक जोड़ने की योजना अटकी
- धीमी रफ्तार से बढ़ रही लोगों की नाराजगी
- अफसरों का दावा—अब तेजी से पूरा होगा काम
राजधानी रायपुर में ट्रैफिक सुधार के लिए शुरू किया गया स्काईवॉक प्रोजेक्ट तय समयसीमा के बाद भी अधूरा पड़ा है। 8 महीने में पूरा करने का दावा किया गया था, लेकिन 10 महीने बाद भी निर्माण कार्य अधूरा है, जिससे शहरवासियों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
रायपुर। राजधानी में बहुप्रतीक्षित स्काईवॉक प्रोजेक्ट की रफ्तार सुस्त पड़ गई है। निर्धारित समयसीमा से दो महीने अधिक बीत जाने के बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं हो सका है। हालात यह हैं कि कई स्थानों पर केवल पिलर और सीढ़ियां खड़ी नजर आती हैं, जबकि ऊपर का ढांचा और कनेक्टिविटी का काम अब भी अधूरा है।
अधूरा ढांचा, बढ़ती परेशानी
शहर के व्यस्त इलाकों में बन रहे इस स्काईवॉक का उद्देश्य लोगों को सुरक्षित पैदल मार्ग देना था, लेकिन अधूरे निर्माण के कारण यह खुद परेशानी का कारण बनता जा रहा है। नागरिकों का कहना है कि काम की धीमी गति से न सिर्फ असुविधा हो रही है, बल्कि प्रोजेक्ट की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दिन में रोक, रात में काम
जानकारी के मुताबिक भारी ट्रैफिक दबाव के चलते दिन के समय निर्माण कार्य रोक दिया जाता है। इसके बाद रात 10 बजे के बाद काम शुरू होता है। हालांकि इस व्यवस्था के बावजूद निर्माण की गति अपेक्षाकृत धीमी बनी हुई है।
इन प्रमुख स्थानों को जोड़ेगा स्काईवॉक
यह स्काईवॉक डीकेएस अस्पताल से अंबेडकर अस्पताल तक बनाया जा रहा है। इसके जरिए कलेक्ट्रेट, शास्त्री चौक और तहसील कार्यालय जैसे अहम स्थानों को जोड़ा जाना है, ताकि लोग बिना सड़क पार किए सुरक्षित आवाजाही कर सकें।
ट्रैफिक और पार्किंग का भी समाधान
प्रोजेक्ट के तहत सड़क पर वाहनों के दबाव को कम करने के लिए मल्टीलेवल पार्किंग की व्यवस्था भी प्रस्तावित है। स्काईवॉक के माध्यम से लोग सीधे सरकारी दफ्तरों और अस्पतालों तक पैदल पहुंच सकेंगे, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या कम होने की उम्मीद है।
अधिकारियों का भरोसा, लेकिन सवाल बरकरार
अधिकारियों का कहना है कि ट्रैफिक मैनेजमेंट और तकनीकी कारणों से देरी हुई है। अब काम को तेज कर जल्द पूरा करने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, तय समयसीमा पार होने के बाद भी अधूरा प्रोजेक्ट शहर की प्लानिंग और कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है।