- AK-47 समेत साथियों के साथ निकलने की खबर, आधिकारिक पुष्टि बाकी
- कई एनकाउंटर से बच चुका है पश्चिम बस्तर का बड़ा कैडर
- सरेंडर या एनकाउंटर के बाद खत्म हो सकती है डिवीजन कमेटी
- देवा के बाद पापा राव ही बचा था सक्रिय फाइटर
- बस्तर में अब 200-300 सशस्त्र नक्सली ही बचे
बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करने की तय समयसीमा से ठीक पहले सुरक्षा एजेंसियों को बड़ी सफलता मिलने के संकेत हैं। पश्चिम बस्तर डिवीजन का प्रमुख नक्सली कमांडर पापा राव अपने साथियों के साथ सरेंडर करने की तैयारी में है। अगर यह होता है, तो बस्तर में नक्सलवाद की कमर पूरी तरह टूटने की संभावना जताई जा रही है।
जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में नक्सल विरोधी अभियान निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। बस्तर को नक्सल मुक्त घोषित करने की डेडलाइन से करीब एक सप्ताह पहले पश्चिम बस्तर का बड़ा नक्सली कमांडर पापा राव उर्फ मंगू के सरेंडर की खबर सामने आई है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सूत्रों के मुताबिक, पापा राव अपने कुछ साथियों के साथ AK-47 सहित अन्य हथियार लेकर निकला है और जल्द ही आत्मसमर्पण कर सकता है।
कई एनकाउंटर से बच निकला कमांडर
करीब 56 वर्षीय पापा राव सुकमा जिले का रहने वाला है और लंबे समय से नक्सल संगठन में सक्रिय रहा है। वह DKSZCM का सदस्य होने के साथ-साथ पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब-जोनल ब्यूरो से भी जुड़ा हुआ है।
बस्तर के दुर्गम जंगलों और भौगोलिक परिस्थितियों की गहरी जानकारी होने के कारण वह कई बार सुरक्षा बलों के एनकाउंटर से बच निकलने में सफल रहा है।
सरेंडर के साथ खत्म हो सकती है डिवीजन कमेटी
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि पापा राव के सरेंडर या एनकाउंटर के बाद पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी पूरी तरह खत्म हो जाएगी। बटालियन नंबर-1 के कमांडर देवा के पहले ही हथियार डालने के बाद पापा राव ही एकमात्र सक्रिय फाइटर बचा था।
पिछले एक साल में बड़े ऑपरेशन
पिछले वर्ष सुरक्षा बलों ने कई बड़े नक्सली नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की। इनमें माड़वी हिड़मा, बसवाराजू और गणेश उइके जैसे कुख्यात नामों के साथ 17 बड़े कैडर ढेर किए गए। वहीं भूपति, रूपेश और रामधेर जैसे कई शीर्ष नक्सलियों ने अपने साथियों के साथ आत्मसमर्पण कर दिया। फिलहाल संगठन की कमान मिशिर बेसरा और गणपति जैसे शीर्ष नेताओं के हाथ में मानी जा रही है।
अब कितने नक्सली बचे?
बस्तर में लगातार चल रहे ऑपरेशनों के बाद नक्सल संगठन काफी कमजोर हो चुका है। वर्तमान में अलग-अलग इलाकों में करीब 200 से 300 सशस्त्र नक्सली ही सक्रिय बताए जा रहे हैं, जो छोटे-छोटे समूहों में बंटे हुए हैं। MMC जोन पूरी तरह समाप्त हो चुका है, जबकि उत्तर बस्तर और माड़ डिवीजन में भी नक्सलियों का लगभग सफाया हो चुका है।