‘बुद्धि से चर्चा’ टिप्पणी पर भड़के पार्षद; कांग्रेस-बीजेपी एकजुट, आयुक्त को हटाने की मांग तेज
नगर निगम के बजट सत्र में इस बार वित्तीय प्रस्ताव से ज्यादा आयुक्त के बयान को लेकर सियासी तापमान बढ़ा रहा। 838 करोड़ से अधिक का बजट पेश होने के बीच आयुक्त की टिप्पणी पर पक्ष-विपक्ष एक साथ विरोध में उतर आए और निंदा प्रस्ताव पारित कर दिया गया।
भिलाई। भिलाई नगर निगम का अंतिम बजट सत्र इस बार हंगामेदार रहा। महापौर नीरज पाल ने वित्तीय वर्ष 2026–27 के लिए 838 करोड़ रुपए से अधिक का बजट सदन में प्रस्तुत किया, लेकिन चर्चा के दौरान आयुक्त राजीव पांडेय की टिप्पणी ने माहौल को गरमा दिया।
आयुक्त द्वारा “बुद्धि पूर्वक चर्चा होगी तो ही बैठूंगा” कहे जाने पर कांग्रेस और बीजेपी दोनों दलों के पार्षदों ने तीखी आपत्ति जताई। स्थिति इतनी बढ़ गई कि महापौर सहित सभी पार्षदों ने आयुक्त के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर दिए और उन्हें हटाने की मांग उठाई।
सत्र समाप्त होने के बाद महापौर नीरज पाल ने कहा कि आयुक्त की भाषा अमर्यादित थी और यह सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं है। नेता प्रतिपक्ष भोजराम सिन्हा ने भी इस टिप्पणी को अपमानजनक बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की।
वहीं, आयुक्त राजीव पांडेय ने अपने बयान पर सफाई देते हुए कहा कि सदन में पूछे गए सवालों का जवाब पहले एमआईसी सदस्यों को देना चाहिए। यदि आवश्यक हो, तो सभापति के निर्देश पर अधिकारी जवाब देते हैं। उनके मुताबिक, इसी प्रक्रिया को स्पष्ट करने के दौरान गलतफहमी पैदा हुई।
सदन में अन्य मुद्दों पर भी तीखी बहस हुई। बीजेपी पार्षद पीयूष मिश्रा ने शिक्षा उपकर की राशि के उपयोग को लेकर सवाल उठाते हुए इसे नियमों के विरुद्ध बताया और आर्थिक अनियमितता की आशंका जताई।
इस पर महापौर ने जवाब देते हुए स्थिति स्पष्ट की, वहीं कांग्रेस पार्षद के. जगदीश ने कहा कि यदि कहीं भ्रष्टाचार हुआ है तो कार्रवाई की जाए, केवल आरोप लगाने से काम नहीं चलेगा।
आयुक्त ने यह भी आश्वासन दिया कि भविष्य में शिक्षा उपकर की राशि का उपयोग केवल शिक्षा संबंधी कार्यों में ही किया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस मद में लगभग 4 करोड़ रुपए प्राप्त हुए हैं, जबकि बीएसपी से इस बार भवन अनुज्ञा के तहत 3 करोड़ रुपए की आय हुई है।