सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर केस रिओपन; अमित जोगी की भूमिका फिर चर्चा में, जमानत लेने की स्थिति
छत्तीसगढ़ के चर्चित रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक बार फिर कानूनी हलचल तेज हो गई है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद हाईकोर्ट में केस की दोबारा सुनवाई शुरू हो गई है, जिसमें 1 अप्रैल को अंतिम बहस तय की गई है।
बिलासपुर। करीब दो दशक पुराने रामावतार जग्गी हत्याकांड ने एक बार फिर न्यायिक प्रक्रिया में गति पकड़ ली है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह मामला छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में पुनः खोला गया है, जहां चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने सुनवाई करते हुए 1 अप्रैल को अंतिम सुनवाई की तारीख निर्धारित की है।
इस दौरान मृतक के पुत्र सतीश जग्गी भी अदालत में उपस्थित रहे। बताया जा रहा है कि अब इस केस की मेरिट पर विस्तार से बहस होगी, जिसमें सभी पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने दोषियों की अपील खारिज करते हुए उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई की अपील स्वीकार कर मामले को पुनर्विचार के लिए हाईकोर्ट भेज दिया।
इस केस में पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी का नाम भी सामने आया था। सीबीआई ने उन्हें साजिश का आरोपी बनाया था, लेकिन साक्ष्यों के अभाव में विशेष अदालत ने वर्ष 2007 में उन्हें बरी कर दिया था। अब केस दोबारा खुलने के बाद कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि उन्हें फिर से जमानत लेनी पड़ सकती है।
सतीश जग्गी का कहना है कि अब अमित जोगी पुनः इस केस में आरोपी की स्थिति में आ गए हैं और आगामी सुनवाई में सीबीआई, राज्य सरकार और अन्य पक्ष अदालत में अपना पक्ष रखेंगे। इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए अमित जोगी ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और सत्य की जीत निश्चित है।