कच्चे माल की कीमतों में उछाल, प्लास्टिक उद्योग संकट में; एलपीजी कमी से हजारों इकाइयां बंद
पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब आम लोगों की जेब पर पड़ने लगा है। कच्चे तेल और अन्य कच्चे माल की कीमतों में तेजी के चलते कंपनियां उपभोक्ता वस्तुओं के दाम बढ़ाने की तैयारी में हैं।
नई दिल्ली (ए)। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता का असर घरेलू उद्योगों पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के कारण प्लास्टिक सहित कई उद्योगों की उत्पादन लागत में भारी वृद्धि हुई है, जिससे रोजमर्रा के उपयोग की वस्तुओं के दाम बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। बोतलबंद पानी, खाद्य तेल, नमक से लेकर एसी, फ्रिज और मेडिकल उत्पादों तक महंगाई की मार पड़ सकती है।
प्लास्टिक उद्योग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है, जहां कच्चे माल की कीमतों में पिछले एक महीने में 50 से 70 प्रतिशत तक उछाल आया है। एलडीपीई जैसे प्रमुख कच्चे पदार्थ की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। इसके साथ ही अन्य पॉलिमर के दाम भी तेजी से बढ़े हैं, जिससे अप्रैल में प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में भारी वृद्धि की संभावना है।
स्थिति को और गंभीर बनाते हुए कॉमर्शियल एलपीजी की कमी ने उत्पादन पर असर डाला है। देशभर में हजारों छोटे और मध्यम प्लांट या तो बंद हो गए हैं या कम क्षमता पर चल रहे हैं। उद्योग संगठनों के अनुसार, यह संकट लंबा खिंचने पर बड़े पैमाने पर रोजगार पर असर पड़ सकता है।
इधर शहरी क्षेत्रों में एलपीजी संकट और घरेलू कामगारों की कमी के कारण लोगों की जीवनशैली में भी बदलाव देखा जा रहा है। रेडी-टू-ईट खाद्य उत्पादों की मांग में तेजी आई है, जबकि वैकल्पिक कुकिंग साधनों की बिक्री में भी उछाल दर्ज किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।