पाक रक्षा मंत्री के बयान पर इजराइल की कड़ी आपत्ति
अमेरिका-ईरान वार्ता से पहले बढ़ी कूटनीतिक तल्खी
इस्लामाबाद में होने वाली बैठक पर टिकी वैश्विक नजर
पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के विवादित बयान के बाद इजराइल और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव तेज हो गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच संभावित संघर्ष विराम को लेकर अहम वार्ता की तैयारी चल रही है।
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन (ए)। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री Khawaja Asif द्वारा इजराइल के खिलाफ दिए गए तीखे बयान के बाद दोनों देशों के बीच विवाद गहरा गया है। आसिफ ने इजराइल पर गाजा, ईरान और लेबनान में आम नागरिकों के खिलाफ हिंसा करने का आरोप लगाते हुए उसे मानवता के लिए खतरा बताया।
इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए Prime Minister’s Office (Israel) ने इसे आपत्तिजनक करार दिया। इजराइल की ओर से कहा गया कि इस तरह की टिप्पणी देश के अस्तित्व पर सवाल उठाने जैसी है और इसे किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता, खासकर तब जब पाकिस्तान खुद को क्षेत्रीय शांति वार्ता का मध्यस्थ बता रहा है।
यह विवाद ऐसे समय उभरा है जब अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम को लेकर महत्वपूर्ण वार्ता प्रस्तावित है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, यह बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित की जाएगी।
सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल वार्ता में भाग लेने के लिए शुक्रवार को इस्लामाबाद पहुंचेगा, जबकि ईरानी प्रतिनिधि पहले ही वहां पहुंच चुके हैं। अमेरिका की ओर से उपराष्ट्रपति JD Vance वार्ता का नेतृत्व करेंगे, वहीं ईरान की तरफ से संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf प्रतिनिधित्व करेंगे।
वार्ता के एजेंडे में ईरान का परमाणु कार्यक्रम प्रमुख मुद्दा रहेगा, जिसमें अमेरिका यूरेनियम संवर्धन पर रोक और परमाणु सुविधाओं को सीमित करने की मांग कर रहा है। इसके अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की निर्बाध आवाजाही और ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर भी चर्चा होने की संभावना है।
वहीं, ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंध हटाने, जमे हुए संसाधनों की वापसी और मुआवजे की मांग रखी है।
इस बीच, क्षेत्रीय तनाव को देखते हुए South Korea ने भी सक्रियता बढ़ा दी है। दक्षिण कोरिया ने अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष दूत Chung Byung-ha को ईरान भेजने का फैसला किया है। वे तेहरान जाकर हालात का आकलन करेंगे और समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर बातचीत करेंगे।
बताया जा रहा है कि वर्तमान में दक्षिण कोरिया के कई जहाज, जिनमें तेल टैंकर भी शामिल हैं, होर्मुज मार्ग से गुजरने में कठिनाई का सामना कर रहे हैं।