तीन कंपनियों की मिलीभगत उजागर, ACB ने 4 आरोपियों के खिलाफ पेश किया चालान; ‘हमर लैब’ योजना में भारी वित्तीय नुकसान
छत्तीसगढ़ मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन (CGMSC) से जुड़े बहुचर्चित 550 करोड़ रुपए के घोटाले में जांच तेज हो गई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने पूरक चालान पेश कर नए आरोपियों की भूमिका उजागर की है, जिससे पूरे मामले में संगठित साजिश के संकेत मिल रहे हैं।
रायपुर। CGMSC घोटाले में एंटी करप्शन ब्यूरो ने जांच को आगे बढ़ाते हुए चार और आरोपियों के खिलाफ पूरक चालान अदालत में पेश किया है। जांच में सामने आया है कि मेडिकल उपकरण और रिएजेंट्स की खरीद में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गईं, जिससे राज्य शासन को करीब 550 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।
ACB की जांच के मुताबिक ‘हमर लैब’ योजना के तहत सरकारी अस्पतालों के लिए उपकरण और जांच सामग्री की खरीद में तीन प्रमुख कंपनियों—रिकॉर्डर्स एंड मेडिकेयर सिस्टम्स, श्री शारदा इंडस्ट्रीज और मोक्षित कॉर्पोरेशन—ने मिलकर सिंडिकेट बनाकर टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित किया। कंपनियों ने फर्जी दस्तावेजों और समान दरों के जरिए प्रतिस्पर्धा को सीमित कर दिया।
जांच में यह भी उजागर हुआ कि कंपनियों ने अपनी पात्रता साबित करने के लिए भ्रामक जानकारी दी और उत्पादों की कीमतें वास्तविक बाजार मूल्य से कई गुना अधिक दर्शाईं। विशेष रूप से डायसिस इंडिया के मार्केटिंग हेड कुंजल शर्मा पर आरोप है कि उन्होंने साजिश के तहत रिएजेंट्स और कंज्यूमेबल्स की कीमतें बढ़ाकर पेश कीं, जिससे उच्च दरों पर टेंडर स्वीकृत हो गए।
ACB के अनुसार, अब तक इस मामले में 10 आरोपियों के खिलाफ चालान प्रस्तुत किया जा चुका है और जांच अभी जारी है। साक्ष्यों के आधार पर आगे भी कार्रवाई की संभावना जताई गई है।
इस घोटाले का खुलासा तब हुआ जब पूर्व गृहमंत्री ननकीराम कंवर ने वर्ष 2024 में केंद्र सरकार के विभिन्न एजेंसियों से शिकायत की। इसके बाद आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने मामले की जांच शुरू की और FIR दर्ज की गई।
जांच रिपोर्ट के अनुसार, CGMSC अधिकारियों ने मोक्षित कॉर्पोरेशन को बेहद कम समय में सैकड़ों करोड़ के ऑर्डर जारी किए, जबकि तत्काल आवश्यकता नहीं थी। आरोप है कि टेंडर की शर्तें भी कंपनियों के अनुकूल बनाई गईं, जिससे अन्य प्रतिस्पर्धी बाहर हो गए।
इस मामले में कथित मास्टरमाइंड शशांक चोपड़ा से पूछताछ के बाद कई अधिकारियों की भूमिका भी सामने आई है, जिन पर संरक्षण देने के आरोप लगे हैं। फिलहाल जांच एजेंसियां पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी हैं।