- पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट; 54 वोट से अटका बिल
- 528 सांसदों ने किया मतदान, 352 वोट जरूरी थे
- 21 घंटे चली चर्चा, 130 सांसदों ने रखे विचार
लोकसभा में महिला आरक्षण से जुड़े 131वें संविधान संशोधन विधेयक को आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं मिल पाने के कारण पारित नहीं किया जा सका। पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 वोट पड़ने से यह बिल 54 वोटों से पीछे रह गया। लंबे समय से लंबित इस महत्वपूर्ण विधेयक पर सदन में व्यापक चर्चा हुई, लेकिन अंततः सहमति का आंकड़ा नहीं बन सका।
नई दिल्ली (ए)। महिला आरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण 131वें संविधान संशोधन विधेयक को लोकसभा में झटका लगा है। कुल 528 सांसदों ने मतदान में भाग लिया, जिसमें बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। चूंकि इस तरह के संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए दो-तिहाई बहुमत यानी 352 वोट आवश्यक थे, इसलिए यह विधेयक 54 वोटों से पारित नहीं हो सका।
इस विधेयक पर सदन में करीब 21 घंटे तक विस्तृत चर्चा हुई, जिसमें 130 सांसदों ने अपने विचार रखे। इनमें 56 महिला सांसद भी शामिल रहीं, जिन्होंने महिला प्रतिनिधित्व को लेकर अपने तर्क प्रस्तुत किए।
चर्चा के दौरान पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में विपक्ष पर बिना ठोस कारण के विरोध करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सरकार महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध है और इस दिशा में हर संभव प्रयास जारी रहेगा।
वहीं विपक्ष ने भी अपने तर्क रखते हुए विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर सवाल उठाए। बहस के दौरान कई मुद्दों पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए, जिससे सदन का माहौल काफी गर्म रहा।
यह विधेयक लंबे समय से देश की राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। इसके माध्यम से लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को आरक्षण देने का प्रावधान किया जाना था। हालांकि, इस बार आवश्यक समर्थन नहीं मिलने के कारण यह प्रयास अधूरा रह गया।
संसद की कार्यवाही के दौरान इस विधेयक को लेकर कई अहम राजनीतिक बयान भी सामने आए, जिससे आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीति और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।