7 जिलों में शत-प्रतिशत योजनाओं का लाभ पहुंचाने लक्ष्य, चरणबद्ध शिविरों से होगी निगरानी
छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर संभाग के समग्र विकास को गति देने के लिए ‘बस्तर मुन्ने’ अभियान की शुरुआत की है। इस पहल के जरिए शासन का लक्ष्य है कि क्षेत्र के हर पात्र व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाकर विकास के प्रमुख मानकों में सुधार किया जाए।
रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने सुशासन और समावेशी विकास की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए बस्तर संभाग के लिए ‘बस्तर मुन्ने’ अभियान शुरू किया है। गोंडी भाषा में ‘अग्रणी बस्तर’ का अर्थ रखने वाले इस अभियान का उद्देश्य क्षेत्र के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ सभी पात्र हितग्राहियों तक सरकारी योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ पहुंचाना है।
यह विशेष अभियान बस्तर संभाग के सात जिलों—दंतेवाड़ा, बीजापुर, सुकमा, कोंडागांव, नारायणपुर, बस्तर और कांकेर—में संचालित किया जाएगा। इसके तहत “सैचुरेशन अप्रोच” अपनाकर हर पात्र व्यक्ति को योजनाओं से जोड़ने का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही 31 प्रमुख विकास संकेतकों के आधार पर प्रगति का नियमित मूल्यांकन भी किया जाएगा।
अभियान के सफल संचालन की जिम्मेदारी पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को सौंपी गई है। अप्रैल 2026 से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम ग्राम पंचायत से लेकर विधानसभा स्तर तक चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।
पहले चरण में घर-घर संपर्क और जनजागरूकता के माध्यम से लोगों को योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके बाद सर्वे कर पात्र हितग्राहियों की पहचान की जाएगी और ग्राम पंचायत स्तर पर शिविर आयोजित कर उन्हें योजनाओं से जोड़ा जाएगा। आगे के चरणों में क्लस्टर और विकासखंड स्तर पर लंबित मामलों का निराकरण किया जाएगा।
अंतिम चरण में थर्ड पार्टी के जरिए अभियान का मूल्यांकन और फीडबैक लिया जाएगा, जिससे इसकी प्रभावशीलता का आकलन हो सके। अभियान के दौरान जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी, वहीं मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और मंत्रीगण भी शिविरों में पहुंचकर हितग्राहियों से सीधे संवाद कर सकते हैं।
सरकार का मानना है कि इस पहल से बस्तर क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, रोजगार और आधारभूत सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार होगा और आम लोगों के जीवन स्तर में सकारात्मक बदलाव आएगा।