फर्जी दस्तावेजों के जरिए लिया गया कर्ज, रकम दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर करने का आरोप
एक्सिस बैंक की शिकायत पर EOW की कार्रवाई, 2010 से 2019 के बीच की बताई जा रही साजिश
मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने Anil Ambani ग्रुप से जुड़ी कंपनियों के तत्कालीन निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश का मामला दर्ज किया है। आरोप है कि फर्जी दस्तावेजों के आधार पर 150 करोड़ रुपए का लोन लेकर उसे दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया और बाद में भुगतान नहीं किया गया।
नई दिल्ली (ए)। उद्योगपति Anil Ambani के समूह से जुड़ी कंपनियां एक बार फिर वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों में घिर गई हैं। मुंबई पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने एक्सिस बैंक की शिकायत पर अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप (ADAG) से संबंधित कंपनियों के तत्कालीन निदेशकों और अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक साजिश और वित्तीय गड़बड़ी का मामला दर्ज किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने बैंक से 150 करोड़ रुपए का लोन हासिल करने के लिए फर्जी दस्तावेज और भ्रामक वित्तीय जानकारियां प्रस्तुत कीं। लोन स्वीकृत होने के बाद रकम को तय कारोबारी उद्देश्य में इस्तेमाल करने के बजाय समूह से जुड़ी अन्य कंपनियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया गया। बाद में लोन का भुगतान भी नहीं किया गया, जिससे बैंक को भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।
सूत्रों के मुताबिक, यह पूरा मामला जनवरी 2010 से नवंबर 2019 के बीच का है। जांच में सामने आया है कि Reliance Home Finance Limited (RHFL) के तत्कालीन पूर्णकालिक निदेशकों, ADAG समूह की लाभार्थी कंपनियों और अन्य संबंधित अधिकारियों ने मिलकर कथित साजिश को अंजाम दिया।
यह कार्रवाई एक्सिस बैंक के वाइस प्रेसिडेंट प्रकाश प्रभाकर राव की शिकायत के आधार पर की गई है। बैंक का आरोप है कि संबंधित कंपनियों और अधिकारियों ने सुनियोजित तरीके से बैंक को गुमराह कर वित्तीय लाभ उठाया।
गौरतलब है कि एक्सिस बैंक की शिकायत पर यह दूसरी बड़ी FIR दर्ज की गई है। इससे पहले 12 मार्च 2026 को भी आर्थिक अपराध शाखा ने अनिल अंबानी समूह से जुड़ी कंपनियों और कई निदेशकों के खिलाफ इसी तरह के आरोपों में मामला दर्ज किया था।
जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि लोन की राशि किन-किन कंपनियों में ट्रांसफर की गई और इसमें किन अधिकारियों की भूमिका रही। मामले में आगे और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
क्या है EOW और लोन डाइवर्जन?
आर्थिक अपराध शाखा (EOW) पुलिस की विशेष इकाई होती है, जो बड़े वित्तीय घोटालों, कॉरपोरेट फ्रॉड, जालसाजी और आर्थिक अपराधों की जांच करती है।
वहीं, लोन डाइवर्जन उस स्थिति को कहा जाता है जब किसी विशेष उद्देश्य के लिए लिया गया बैंक लोन तय कार्य में इस्तेमाल न कर दूसरी कंपनियों या अन्य कामों में ट्रांसफर कर दिया जाता है। इसे बैंकिंग नियमों का गंभीर उल्लंघन माना जाता है।