अमेरिका-ईरान तनाव से महंगा हुआ कच्चा तेल, निवेशकों की बढ़ी चिंता
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी, साउथ कोरिया का बाजार 3 फीसदी से ज्यादा टूटा
मुंबई (ए)। बकरीद के अवसर पर गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में कारोबार बंद रहा। हालांकि कमोडिटी मार्केट में दोपहर तक अवकाश रहेगा और शाम 5 बजे से ट्रेडिंग दोबारा शुरू होगी। इस बीच वैश्विक बाजारों में दबाव का असर साफ दिखाई दिया, जहां एशियाई शेयर बाजारों में भारी गिरावट दर्ज की गई। बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
बुधवार को घरेलू शेयर बाजार कमजोर रुख के साथ बंद हुए थे। सेंसेक्स 142 अंकों की गिरावट के साथ 75,868 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी भी मामूली 7 अंक फिसलकर 23,907 के स्तर पर आ गया। बैंकिंग सेक्टर के शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला।
वैश्विक बाजारों की बात करें तो दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 3 प्रतिशत से ज्यादा टूट गया। जापान के निक्केई और हांगकांग के हैंगसेंग इंडेक्स में भी बड़ी गिरावट दर्ज की गई। दूसरी ओर अमेरिकी बाजार बुधवार को हल्की बढ़त के साथ बंद हुए, जहां डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 में सीमित तेजी देखने को मिली।
बाजार पर विदेशी निवेशकों की बिकवाली का असर लगातार बना हुआ है। पिछले 30 दिनों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब 45 हजार करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने खरीदारी कर बाजार को कुछ सहारा देने की कोशिश की है।
इधर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड ऑयल करीब 4 प्रतिशत महंगा होकर 98 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। तेल की बढ़ती कीमतों को लेकर वैश्विक निवेशकों की चिंता बढ़ गई है, क्योंकि इसका सीधा असर महंगाई, परिवहन लागत और कंपनियों की उत्पादन लागत पर पड़ता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक भारत अपनी जरूरत का अधिकांश कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने से आयात बिल बढ़ता है और रुपये पर दबाव बनता है। कंपनियों की लागत बढ़ने से मुनाफा घटने की आशंका रहती है, जिसके चलते निवेशक शेयर बाजार से दूरी बनाने लगते हैं। यही वजह है कि कच्चे तेल की कीमतों में तेजी अक्सर बाजार में गिरावट का कारण बनती है।