DRDO ने ओडिशा के चांदीपुर रेंज में लगातार तीन सफल फ्लाइट टेस्ट किए, लंबी दूरी की बैलिस्टिक और इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइलों को हवा में नष्ट करने की क्षमता का प्रदर्शन।
भारत ने अपनी सामरिक रक्षा क्षमता को नई ऊंचाई पर पहुंचाते हुए स्वदेशी मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा के चांदीपुर परीक्षण केंद्र में हुए लगातार तीन फ्लाइट टेस्ट के जरिए यह साबित किया गया कि देश अब 5000 किलोमीटर से अधिक दूरी से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) जैसे खतरों का भी प्रभावी मुकाबला करने में सक्षम है। इस उपलब्धि के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जिनके पास अत्याधुनिक ऑपरेशनल मिसाइल डिफेंस सिस्टम मौजूद है।
नई दिल्ली (ए)। भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए स्वदेशी मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) सिस्टम की क्षमता का सफल प्रदर्शन किया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने 10 और 11 जून को ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज में लगातार तीन सफल फ्लाइट टेस्ट किए। इन परीक्षणों ने साबित कर दिया कि भारत अब लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों के साथ-साथ इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) श्रेणी के खतरों का भी मुकाबला करने में सक्षम है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने परीक्षण से जुड़ी तस्वीरें साझा करते हुए इसे देश की सामरिक सुरक्षा को मजबूत करने वाली ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। इस स्वदेशी प्रणाली का उद्देश्य दुश्मन की मिसाइल को उसके लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही हवा में नष्ट करना है, जिससे बड़े पैमाने पर होने वाले नुकसान को रोका जा सके।
मल्टी-लेयर्ड बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम कई सुरक्षा परतों में काम करता है। सबसे पहले अत्याधुनिक रडार दुश्मन की मिसाइल का पता लगाते हैं। इसके बाद कमांड एंड कंट्रोल सेंटर खतरे का विश्लेषण करता है और इंटरसेप्टर मिसाइल को सक्रिय करता है। यह इंटरसेप्टर हवा में जाकर दुश्मन की मिसाइल को निशाना बनाकर नष्ट कर देता है। यदि पहली सुरक्षा परत लक्ष्य को भेदने में विफल रहती है तो दूसरी और तीसरी परत सक्रिय होकर खतरे को खत्म करने का प्रयास करती हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार यह प्रणाली 5,000 किलोमीटर से अधिक दूरी से दागी जाने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों के खिलाफ भी प्रभावी सुरक्षा प्रदान कर सकती है। इसके साथ ही DRDO ने नेवल एंटी-शिप मिसाइल (मीडियम रेंज) का भी सफल परीक्षण किया, जिससे भारत की समुद्री रक्षा क्षमता को और मजबूती मिलेगी।
इस उपलब्धि के साथ भारत अमेरिका, रूस, इजराइल और चीन जैसे देशों की उस विशिष्ट श्रेणी में शामिल हो गया है, जिनके पास ऑपरेशनल स्तर की बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस तकनीक उपलब्ध है। यह सफलता आत्मनिर्भर भारत और स्वदेशी रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर मानी जा रही है।
क्या है ICBM?
इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) ऐसी रणनीतिक मिसाइल होती है, जिसकी मारक क्षमता 5,500 किलोमीटर से अधिक होती है। यह एक महाद्वीप से दूसरे महाद्वीप तक हमला करने में सक्षम होती है और अधिकांश ICBM परमाणु हथियार ले जाने की क्षमता भी रखती हैं। अत्यधिक गति और ऊंचाई के कारण इन्हें रोकना किसी भी देश के लिए बड़ी चुनौती माना जाता है।
परीक्षण के लिए खाली कराए गए 11 गांव
चांदीपुर परीक्षण रेंज में सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए लॉन्च पैड के आसपास स्थित 11 गांवों से 11,442 लोगों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था। परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद सभी ग्रामीणों को वापस अपने घर लौटने की अनुमति दे दी गई।