केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय की सैद्धांतिक मंजूरी, पांच वर्षों तक मिलेगा वित्तीय सहयोग; शोध, प्रकाशन और अकादमिक गतिविधियों को नई दिशा।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग को राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय में डॉ. अंबेडकर चेयर (शोध पीठ) की स्थापना के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इसके साथ ही यह छत्तीसगढ़ का पहला विश्वविद्यालय बन जाएगा, जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर के सामाजिक न्याय, समान अवसर और समावेशी विकास के विचारों पर केंद्रित शोध पीठ स्थापित होगी। इस पहल से प्रदेश में उच्च शिक्षा, सामाजिक अनुसंधान और वंचित वर्गों से जुड़े अध्ययन को नई गति मिलने की उम्मीद है।
दुर्ग। हेमचंद यादव विश्वविद्यालय ने उच्च शिक्षा और शोध के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्र सरकार ने विश्वविद्यालय में डॉ. अंबेडकर चेयर (शोध पीठ) की स्थापना के लिए सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान कर दी है। इस मंजूरी के साथ विश्वविद्यालय छत्तीसगढ़ का पहला ऐसा संस्थान बन गया है, जहां डॉ. भीमराव अंबेडकर के विचारों और सामाजिक दर्शन पर केंद्रित शोध पीठ स्थापित की जाएगी।
यह स्वीकृति सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अंतर्गत संचालित डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन, नई दिल्ली द्वारा दी गई है। फाउंडेशन के निदेशक मनोज तिवारी की ओर से जारी पत्र के माध्यम से विश्वविद्यालय को इसकी औपचारिक जानकारी मिली है।
विशेष बात यह है कि देशभर में अब तक केवल 24 प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों को इस योजना से जोड़ा गया है। इनमें जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू), पटना विश्वविद्यालय और आईआईएम विशाखापट्टनम जैसे प्रमुख संस्थान शामिल हैं। अब हेमचंद यादव विश्वविद्यालय भी इस विशिष्ट सूची का हिस्सा बनने जा रहा है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. संजय तिवारी ने बताया कि उन्होंने नई दिल्ली में डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन के समक्ष विश्वविद्यालय का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया था। इसमें छत्तीसगढ़ के जनजातीय क्षेत्रों, सामाजिक परिस्थितियों, उच्च शिक्षा की चुनौतियों और वंचित वर्गों के लिए शोध आधारित अध्ययन की आवश्यकता को प्रमुखता से रखा गया। इसी के आधार पर विश्वविद्यालय के प्रस्ताव को स्वीकृति मिली।
योजना के तहत विश्वविद्यालय को प्रतिवर्ष 75 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अलावा 10 लाख रुपए का एकमुश्त स्थापना अनुदान भी मिलेगा। वार्षिक सहायता राशि में 20 लाख रुपए शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन तथा 55 लाख रुपए वेतन और प्रशासनिक खर्चों के लिए निर्धारित किए गए हैं। बेहतर प्रदर्शन की स्थिति में विश्वविद्यालय को 1 करोड़ रुपए तक का अतिरिक्त अनुसंधान अनुदान भी प्राप्त हो सकता है।
शोध पीठ के संचालन के लिए एक चेयर प्रोफेसर और एक सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति की जाएगी। साथ ही दो शोधार्थियों को मासिक 35 हजार रुपए की डॉक्टोरल फेलोशिप एवं अन्य सुविधाएं प्रदान की जाएंगी। इस पहल का उद्देश्य सामाजिक न्याय, समानता, समावेशी विकास और संवैधानिक मूल्यों पर केंद्रित अध्ययन एवं अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है।
कुलपति ने बताया कि योजना के तहत प्रत्येक वर्ष यूजीसी-केयर सूचीबद्ध कम से कम दो शोध पत्र प्रकाशित करना तथा एक संपादित पुस्तक का प्रकाशन अनिवार्य होगा। अब विश्वविद्यालय विस्तृत प्रस्ताव भेजने की प्रक्रिया पूरी करेगा, जिसके बाद डॉ. अंबेडकर फाउंडेशन और विश्वविद्यालय के बीच औपचारिक समझौता (एमओयू) किया जाएगा।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंबेडकर शोध पीठ की स्थापना से प्रदेश में सामाजिक अध्ययन, अनुसंधान और अकादमिक नवाचार को नई दिशा मिलेगी तथा वंचित और पिछड़े वर्गों के लिए शिक्षा एवं शोध के नए अवसर सृजित होंगे।