ईरान-अमेरिका के बीच संभावित समझौते और कच्चे तेल में नरमी से निवेशकों का भरोसा बढ़ा; ऑटो, बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में जोरदार खरीदारी
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव कम होने के संकेतों ने घरेलू शेयर बाजार में नई ऊर्जा भर दी है। ईरान और अमेरिका के बीच संभावित शांति समझौते की खबरों तथा कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट से निवेशकों का उत्साह बढ़ा, जिसके चलते सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांक डेढ़ प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ कारोबार करते नजर आए।
मुंबई (ए)। वैश्विक मोर्चे से मिले सकारात्मक संकेतों का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने तथा संभावित समझौते की खबरों ने निवेशकों की धारणा को मजबूत किया, जिससे बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिली। कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1200 अंक की छलांग लगाकर 76,700 के स्तर तक पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी 350 अंकों से अधिक की तेजी के साथ 23,985 के आसपास कारोबार करता रहा।
बाजार में सबसे अधिक खरीदारी ऑटोमोबाइल, बैंकिंग और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में दर्ज की गई। निवेशकों ने जोखिम लेने की प्रवृत्ति दिखाई, जिससे प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मजबूत बढ़त देखने को मिली।
विशेषज्ञों के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट को खोले जाने की संभावनाओं और पश्चिम एशिया में तनाव कम होने के संकेतों के चलते वैश्विक बाजारों में राहत का माहौल बना है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ा है। ब्रेंट क्रूड करीब 4 प्रतिशत गिरकर 83 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया, जिससे तेल आयातक देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए राहत की उम्मीद बढ़ी है।
एशियाई बाजारों में भी मजबूत तेजी का रुख देखने को मिला। जापान का निक्केई और दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक उल्लेखनीय बढ़त के साथ कारोबार करते रहे, जबकि हांगकांग का हैंगसेंग भी हरे निशान में रहा। इससे वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत होने के संकेत मिले।
अमेरिकी बाजारों ने भी पिछले कारोबारी सत्र में सकारात्मक प्रदर्शन किया था। डाउ जोन्स, नैस्डैक और एसएंडपी 500 सभी बढ़त के साथ बंद हुए, जिसका असर एशियाई और भारतीय बाजारों पर भी दिखाई दिया।
हालांकि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली का सिलसिला जारी है। पिछले सात कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने करीब 9,760 करोड़ रुपए के शेयर बेचे हैं। इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने लगातार खरीदारी कर बाजार को सहारा दिया है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव और कम होता है तथा कच्चे तेल की कीमतें नियंत्रित रहती हैं, तो आने वाले दिनों में भारतीय शेयर बाजार में सकारात्मक रुख बना रह सकता है।