45 गांवों के ग्रामीणों का पैदल मार्च, पुलिस ने बैरिकेड और ट्रक लगाकर रोका, आंसू गैस छोड़ने के बाद भी नहीं रुका प्रदर्शन
धमतरी जिले में वनांचल क्षेत्र के 45 गांवों से आए हजारों आदिवासियों ने शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, बिजली और अन्य बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर सोमवार को कलेक्ट्रेट का घेराव किया। जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में महिलाएं, बुजुर्ग और युवाओं ने बड़ी संख्या में भाग लिया। प्रशासन द्वारा रोकने के प्रयासों के बावजूद प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर डटे रहे।
रायपुर. धमतरी में सोमवार को उस समय माहौल गरमा गया जब वनांचल क्षेत्र के करीब 45 गांवों के हजारों आदिवासी अपनी मूलभूत सुविधाओं की मांग को लेकर सड़कों पर उतर आए। जल-जंगल-जमीन संघर्ष समिति धमतरी-गरियाबंद के बैनर तले एकजुट हुए ग्रामीणों ने कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च कर प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी जाहिर की।

सुबह करीब साढ़े आठ बजे नगरी ब्लॉक में बड़ी संख्या में ग्रामीण एकत्रित हुए। प्रदर्शन में महिलाएं, पुरुष, बुजुर्ग और युवा शामिल रहे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से वे सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं की मांग करते आ रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि उनके गांवों की स्थिति बेहद दयनीय है। उनका कहना था कि क्षेत्र में सड़क, पुल-पुलिया, अस्पताल और स्कूल जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है, जिससे लोगों को कठिन परिस्थितियों में जीवन बिताना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने यहां तक कहा कि उनके गांवों की स्थिति “नरक से भी बदतर” हो चुकी है।
करीब दोपहर साढ़े 12 बजे हजारों प्रदर्शनकारी शांति घाट पहुंचे और वहां से लगभग 10 किलोमीटर पैदल मार्च करते हुए शहर के मुख्य मार्गों से कलेक्ट्रेट की ओर बढ़े। प्रदर्शन के दौरान वे लगातार अपनी मांगों के समर्थन में नारेबाजी करते रहे। कई प्रदर्शनकारी अपने साथ राशन और जरूरी सामान भी लेकर पहुंचे थे।
प्रशासन ने प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे। रायपुर रेंज से करीब 350 से अधिक पुलिस जवानों को बुलाया गया था। कलेक्ट्रेट परिसर सहित आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा बढ़ा दी गई थी।
प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए बनरौद क्षेत्र के पास सड़क पर बैरिकेड लगाए गए और बीच सड़क पर ट्रक खड़े कर रास्ता अवरुद्ध किया गया। बावजूद इसके ग्रामीण पीछे हटने को तैयार नहीं हुए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले भी छोड़े, लेकिन प्रदर्शनकारी अपने आंदोलन पर डटे रहे।
प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने बताया कि जंगल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति बेहद खराब है। प्रसव के दौरान समय पर इलाज नहीं मिलने से कई बार गंभीर हालात पैदा हो जाते हैं। वहीं बच्चों को स्कूल पहुंचने के लिए कीचड़ और कच्चे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।
बाद में प्रदर्शनकारियों ने कलेक्टर अविनाश मिश्रा को अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन सौंपा। कलेक्टर ने कुछ मांगों पर तत्काल कार्रवाई और शेष मांगों के शीघ्र समाधान का आश्वासन दिया, जिसके बाद प्रदर्शनकारी अपने गांवों के लिए रवाना हुए।