डीकेएस में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग मंजूर होने के बाद भी शुरू नहीं, आंबेडकर अस्पताल में मौजूद विशेषज्ञ भी नहीं देख रहे मरीज
राजधानी रायपुर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में डायबिटीज और हार्मोनल बीमारियों के मरीजों को विशेषज्ञ इलाज नहीं मिल पा रहा है। डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय और डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद होने के बावजूद व्यवस्था पूरी तरह शुरू नहीं हो सकी है। इसके चलते हर दिन सैकड़ों मरीजों को सामान्य विभागों में इलाज कराना पड़ रहा है, जिससे गंभीर रोगों के उपचार में बाधा उत्पन्न हो रही है।
रायपुर। राजधानी के डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एंडोक्राइनोलॉजी विभाग को शासन से मंजूरी मिलने के बावजूद अब तक शुरू नहीं किया जा सका है। अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों की भर्ती के लिए हर महीने वॉक-इन इंटरव्यू आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन अब तक किसी विशेषज्ञ डॉक्टर ने जॉइन नहीं किया है।
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि डॉक्टर उपलब्ध होते ही विभाग को पूरी तरह शुरू कर दिया जाएगा।
आंबेडकर अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टर होने के बावजूद सेवा बाधित
डॉ. भीमराव आंबेडकर स्मृति चिकित्सालय में डीएम एंडोक्राइनोलॉजी डिग्रीधारी डॉक्टर मौजूद हैं, लेकिन वे वर्तमान में डायबिटीज और हार्मोनल बीमारियों के मरीजों का इलाज नहीं कर रहे हैं। इसके चलते इन मरीजों को एमडी मेडिसिन, जिरियाट्रिक और पीडियाट्रिक विभागों में भेजा जा रहा है।
अस्पताल की ओपीडी में रोजाना करीब 2500 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें लगभग 500 मरीज डायबिटीज और हार्मोन से संबंधित समस्याओं से पीड़ित होते हैं।
विशेषज्ञ इलाज के अभाव में बढ़ रहा जोखिम
जानकारों का कहना है कि डायबिटीज केवल शुगर की बीमारी नहीं है, बल्कि यह हृदय, किडनी, नसों और मस्तिष्क से जुड़ी गंभीर जटिलताएं भी पैदा कर सकती है। यही कारण है कि कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी और अन्य सुपर स्पेशलिटी विभागों में भी डायबिटीज मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
बांड शर्तों के बावजूद विशेषज्ञ सेवा पर सवाल
सूत्रों के अनुसार, सरकारी स्पॉन्सरशिप कोटे से सुपर स्पेशलिटी करने वाले डॉक्टरों के लिए संबंधित विषय में सेवा देना अनिवार्य होता है, जो बांड की शर्तों में शामिल है। इसके बावजूद प्रदेश के एकमात्र एंडोक्राइनोलॉजिस्ट द्वारा अपनी विशेषज्ञ सेवाएं नहीं दी जा रही हैं।
बताया जा रहा है कि डॉक्टर वर्तमान में पीडियाट्रिक विभाग में पदस्थ हैं और वेतन एवं पद को लेकर असंतोष के चलते एंडोक्राइनोलॉजी सेवाएं नहीं दे रहे हैं। हालांकि उन्हें इस डिग्री के आधार पर अतिरिक्त इंक्रीमेंट भी मिल चुके हैं।
प्रशासनिक प्रयास जारी, विभाग शुरू होने का इंतजार
अस्पताल प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टर की उपलब्धता होते ही एंडोक्राइनोलॉजी विभाग को पूरी तरह सक्रिय कर दिया जाएगा। फिलहाल विभाग शुरू करने की प्रक्रिया डॉक्टरों की नियुक्ति पर निर्भर है, जिसके लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।