पश्चिम एशिया में युद्धविराम के बाद हॉर्मुज मार्ग से गैस शिपमेंट सामान्य; सरकार ने इमरजेंसी गैस नियंत्रण आदेश वापस लिया
पश्चिम एशिया में तनाव कम होने और समुद्री व्यापार मार्गों के सामान्य होने के बाद केंद्र सरकार ने देश में लागू आपातकालीन गैस नियंत्रण व्यवस्था समाप्त कर दी है। लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई सामान्य होने से औद्योगिक क्षेत्र को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
नई दिल्ली (ए)। देश में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की आपूर्ति अब फिर से सामान्य स्थिति में लौट आई है। पश्चिम एशिया में अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बने तनाव के कम होने और युद्धविराम लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने देश में लागू ‘इमरजेंसी नेचुरल गैस सप्लाई रेगुलेशन ऑर्डर’ को वापस लेने का फैसला किया है। इस कदम से विशेष रूप से औद्योगिक क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलेगी, क्योंकि LNG का उपयोग उद्योगों और उत्पादन इकाइयों में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से LNG जहाजों की आवाजाही एक बार फिर सामान्य हो चुकी है। इसी के मद्देनजर सरकार ने गैस आपूर्ति से जुड़े प्रतिबंधों को समाप्त कर दिया है।
दरअसल, पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के दौरान ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों तथा उसके बाद हुई जवाबी कार्रवाई के चलते स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई थी। हालात इतने गंभीर हो गए थे कि कई अंतरराष्ट्रीय सप्लायर्स ने भारत आने वाले गैस कार्गो को रोक दिया था या उनका रुख दूसरे देशों की ओर मोड़ दिया था।
स्थिति को नियंत्रित करने और घरेलू जरूरतों को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने 9 मार्च 2026 को आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत आपातकालीन गैस आपूर्ति नियंत्रण आदेश लागू किया था। हालात सामान्य होने के बाद सरकार अब अपने सभी प्रमुख आपातकालीन फैसले वापस ले चुकी है। इससे पहले तेल रिफाइनरियों को एलपीजी उत्पादन बढ़ाने के लिए दिए गए विशेष निर्देश भी समाप्त किए जा चुके हैं। इसके अलावा बल्क उपभोक्ताओं के लिए डीजल बिक्री पर लगाई गई सीमा भी हटा ली गई है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है। देश अपनी जरूरत का करीब 88 प्रतिशत कच्चा तेल और लगभग आधी प्राकृतिक गैस विदेशों से खरीदता है। भारत की LNG जरूरतों का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है और इसके लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग माना जाता है। ऐसे में इस रूट पर किसी भी तरह का तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला पर सीधा असर डाल सकता है।