143 कंपनियों के जून तिमाही नतीजे, अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतें, विदेशी निवेश और तकनीकी संकेतों के बीच निवेशक हर गतिविधि पर रखेंगे पैनी नजर।
सोमवार से शुरू होने वाला कारोबारी सप्ताह भारतीय शेयर बाजार के लिए बेहद अहम रहने वाला है। देश की 143 प्रमुख कंपनियों के पहली तिमाही के वित्तीय नतीजों के साथ वैश्विक आर्थिक और भू-राजनीतिक घटनाक्रम बाजार की दिशा तय करेंगे। रिलायंस इंडस्ट्रीज, HDFC बैंक, ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, विप्रो और HCL टेक जैसी दिग्गज कंपनियों के परिणाम, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव, अमेरिका-ईरान तनाव और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां निवेशकों की रणनीति को प्रभावित कर सकती हैं।
मुंबई (ए)। भारतीय शेयर बाजार के लिए 13 जुलाई से शुरू होने वाला सप्ताह कई मायनों में निर्णायक साबित हो सकता है। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि कॉर्पोरेट नतीजों से लेकर अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम तक कई ऐसे कारक हैं, जो सेंसेक्स और निफ्टी की दिशा तय करेंगे। खासतौर पर रिलायंस इंडस्ट्रीज और HDFC बैंक जैसी बड़ी कंपनियों के जून तिमाही (Q1) के नतीजों पर निवेशकों की नजर रहेगी।
इस सप्ताह कुल 143 कंपनियां अपने अप्रैल-जून तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी करेंगी। इनमें बैंकिंग, आईटी और ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनियां शामिल हैं। केवल नतीजे ही नहीं, बल्कि कंपनियों के प्रबंधन की भविष्य की कारोबारी रणनीति और आउटलुक भी बाजार की चाल पर असर डालेंगे।
वैश्विक स्तर पर भी कई घटनाक्रम बाजार के लिए महत्वपूर्ण बने हुए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ला दी है। बीते सप्ताह ब्रेंट क्रूड करीब 5 प्रतिशत और डब्ल्यूटीआई क्रूड 4 प्रतिशत से अधिक मजबूत हुआ। यदि तेल की कीमतों में तेजी जारी रहती है तो इसका असर भारतीय बाजार और महंगाई दोनों पर पड़ सकता है।
विदेशी और घरेलू संस्थागत निवेशकों की खरीदारी भी निवेशकों के लिए अहम संकेत रहेगी। पिछले सप्ताह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने करीब 4,670 करोड़ रुपए के शेयर खरीदे, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) ने 8,280 करोड़ रुपए की शुद्ध खरीदारी कर बाजार को मजबूती दी। इस सप्ताह भी दोनों की निवेश रणनीति पर बाजार की नजर बनी रहेगी।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेत भी घरेलू निवेशकों की धारणा को प्रभावित करेंगे। अमेरिकी शेयर बाजार मजबूती के साथ बंद हुए, जबकि एशियाई बाजारों में भी सकारात्मक रुख देखने को मिला। ऐसे में वैश्विक बाजारों का रुझान भारतीय बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत देगा।
तकनीकी विश्लेषकों के अनुसार, निफ्टी के लिए 24,500 से 24,550 का स्तर मजबूत रेजिस्टेंस माना जा रहा है, जबकि 23,900 से 23,950 का दायरा प्रमुख सपोर्ट जोन रहेगा। इन स्तरों के आधार पर बाजार की अगली दिशा तय होने की संभावना है।
उल्लेखनीय है कि पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 828 अंक की बढ़त के साथ 77,569 और निफ्टी 244 अंक चढ़कर 24,206 पर बंद हुआ था। बैंकिंग और रियल्टी शेयरों में मजबूत खरीदारी से बाजार को सहारा मिला। अब निवेशकों की निगाह इस सप्ताह आने वाले कॉर्पोरेट नतीजों और वैश्विक संकेतों पर टिकी रहेगी।