दुर्ग सत्र अदालत का फैसला; बुलेट और पैतृक जमीन में हिस्सेदारी की मांग को प्रताड़ना का आधार माना, वीडियो कॉल और डिजिटल साक्ष्य बने अहम
दुर्ग-भिलाई। दुर्ग की सत्र अदालत ने भिलाई की 24 वर्षीय नवविवाहिता कंचन राव की मौत को सामान्य आत्महत्या नहीं, बल्कि दहेज उत्पीड़न के कारण हुई दहेज मृत्यु करार देते हुए पति सहित परिवार के पांच सदस्यों को दोषी ठहराया है। अदालत ने सभी आरोपियों को 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने अपने फैसले में कहा कि विवाह के सात वर्ष के भीतर हुई मृत्यु और उससे पहले लगातार दहेज की मांग व मानसिक प्रताड़ना के पर्याप्त प्रमाण उपलब्ध हैं।
करीब दो वर्ष तक चली सुनवाई के बाद सत्र न्यायाधीश के. विनोद कुजूर ने विस्तृत निर्णय सुनाते हुए पति अमित राव, ससुर महेश राव, सास तारा राव, देवर अश्विन उर्फ लक्की और ननद नम्रता राव को दहेज मृत्यु और क्रूरता के अपराध में दोषी माना। अदालत ने कहा कि दहेज की निरंतर मांग और उत्पीड़न ने कंचन को आत्महत्या के लिए मजबूर किया, इसलिए भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 113-बी के तहत दहेज मृत्यु की धारणा लागू होती है।
अभियोजन के अनुसार, कंचन राव का विवाह 16 फरवरी 2022 को अमित राव से हुआ था। विवाह के कुछ समय बाद ही आरोपियों ने बुलेट मोटरसाइकिल की मांग शुरू कर दी। मायके पक्ष ने बताया कि मांग पूरी करने के लिए दो लाख रुपये भी दिए गए, लेकिन प्रताड़ना नहीं रुकी। बाद में कंचन पर उत्तर प्रदेश में स्थित उसके पिता की हाईवे किनारे की जमीन में हिस्सा दिलाने का दबाव बनाया जाने लगा।
मुकदमे के दौरान कंचन द्वारा मृत्यु से कुछ घंटे पहले अपनी भाभी को की गई वीडियो कॉल को महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किया गया। अदालत ने माना कि इस वीडियो कॉल, मोबाइल से प्राप्त वीडियो और वॉयस रिकॉर्डिंग, तथा पिता, भाई, बहन और भाभी की गवाही से यह स्पष्ट हुआ कि मृतका लगातार मानसिक और पारिवारिक उत्पीड़न का सामना कर रही थी। बचाव पक्ष इन साक्ष्यों को अविश्वसनीय सिद्ध नहीं कर सका।
सजा सुनाते समय न्यायालय ने कहा कि दहेज प्रताड़ना जैसे अपराधों में केवल उम्र, बीमारी या पहली बार अपराध करने का आधार राहत देने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता। समाज में ऐसे अपराधों के खिलाफ कड़ा संदेश देने के लिए कठोर दंड आवश्यक है।
अदालत ने सभी पांचों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 304-बी/34 के तहत 10-10 वर्ष के सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई। इसके अलावा धारा 498-ए/34 के तहत तीन-तीन वर्ष का सश्रम कारावास और एक-एक हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है। दोनों सजाएं साथ-साथ चलेंगी।