कवर्धा से लाए गए बच्चों में 7 नाबालिग; रायपुर में नौकरी का झांसा देकर दुर्ग बुलाया गया, बस स्टैंड पर लेने पहुंचे व्यक्ति से पूछताछ
दुर्ग। कवर्धा (कबीरधाम) जिले से लाए गए 16 बच्चों को दुर्ग बस स्टैंड से संयुक्त टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया। राज्य बाल आयोग से मिली सूचना के बाद चाइल्ड हेल्पलाइन, स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU) और पद्मनाभपुर थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बच्चों को बस से उतारा। शुरुआती जांच में 7 बच्चे नाबालिग पाए गए हैं, जबकि सभी बच्चे सुबह से भूखे-प्यासे थे। मामले में बाल श्रम और बच्चों की तस्करी की आशंका को देखते हुए पुलिस ने बस स्टैंड पर बच्चों को लेने पहुंचे एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है।
जिला चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 के जिला परियोजना समन्वयक चंद्रप्रकाश पटेल ने बताया कि बुधवार शाम सूचना मिली थी कि रायपुर से आने वाली एक बस में 10 से अधिक बच्चों को काम के लिए ले जाया जा रहा है। सूचना मिलते ही महिला एवं बाल विकास विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम ने दुर्ग बस स्टैंड पर निगरानी शुरू कर दी।
रात करीब साढ़े आठ बजे बस के पहुंचने पर टीम ने जांच की, जिसमें 16 बच्चे मिले। सभी को सुरक्षित चाइल्ड हेल्पलाइन कार्यालय लाकर उनके दस्तावेजों की जांच, उम्र का सत्यापन और पूछताछ की गई। जांच में सामने आया कि बच्चों को पहले रायपुर में काम दिलाने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन बाद में उन्हें दुर्ग भेज दिया गया। कई बच्चों ने बताया कि उन्हें यह भी नहीं पता था कि दुर्ग में उन्हें कहां और किस काम के लिए ले जाया जा रहा है।
पूछताछ के दौरान कुछ बच्चों ने खुलासा किया कि उन्हें उत्तर प्रदेश में 15 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन पर नौकरी दिलाने का लालच दिया गया था। कुछ बच्चों ने मशरूम फैक्ट्री में काम कराने की बात भी कही, हालांकि यह स्पष्ट नहीं हो सका कि उन्हें दुर्ग में ही रोजगार दिलाया जाना था या किसी अन्य राज्य भेजने की तैयारी थी।
अधिकारियों के अनुसार सभी बच्चे कबीरधाम जिले के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं। कुछ बच्चों के पास आधार कार्ड था, जबकि कुछ की उम्र का प्रारंभिक सत्यापन उनके बयान के आधार पर किया गया। रेस्क्यू के बाद बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया गया और 7 नाबालिगों को सुरक्षित आश्रय गृह में रखा गया है।
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अजय कुमार साहू ने बताया कि राज्य बाल आयोग के निर्देश पर तत्काल कार्रवाई की गई। बस स्टैंड पर बच्चों को लेने पहुंचे व्यक्ति की भूमिका संदिग्ध है और उससे यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि वह ठेकेदार, बिचौलिया या किसी अन्य नेटवर्क से जुड़ा है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि बच्चों को किसने भेजा और उनके गंतव्य तक पहुंचाने की पूरी व्यवस्था किसके द्वारा की गई थी।
गुरुवार को सभी नाबालिग बच्चों को बाल कल्याण समिति (CWC) के समक्ष पेश किया जाएगा। प्रत्येक बच्चे की अलग-अलग काउंसलिंग और विस्तृत पूछताछ की जाएगी। यदि जांच में बाल श्रम या बच्चों की तस्करी से जुड़े किसी संगठित गिरोह के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।