छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और राम मंदिर चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर सरकार से जवाब की मांग; प्रियंका गांधी बोलीं- गृह मंत्री के बयान तक गतिरोध रहेगा
नई दिल्ली (ए)। संसद के मानसून सत्र में सोमवार को विपक्षी दलों ने छात्र प्रदर्शनकारियों पर पुलिस कार्रवाई और अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की कथित चोरी के मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। संसद परिसर में नारेबाजी और धरने के बाद लोकसभा और राज्यसभा में भी हंगामा हुआ, जिसके चलते दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दी गई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि जब तक गृह मंत्री अमित शाह इस मामले पर संसद में बयान नहीं देते, तब तक विपक्ष अपना विरोध जारी रखेगा।
संसद परिसर में कांग्रेस और INDIA गठबंधन के अन्य दलों के सांसदों ने प्रदर्शन करते हुए छात्र आंदोलन पर पुलिस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताया। विपक्ष ने अयोध्या में राम मंदिर चढ़ावे की कथित चोरी के मामले में भी सरकार से विस्तृत जवाब मांगा।
प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि विपक्ष केवल जवाबदेही की मांग कर रहा है और गृह मंत्री के सदन में स्पष्टीकरण दिए बिना संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चलने देना संभव नहीं होगा।
समाजवादी पार्टी के सांसद अखिलेश यादव ने भी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि छात्र आंदोलन के दौरान लाठीचार्ज, आंसू गैस और कथित बल प्रयोग के लिए सरकार जवाब देने से बच रही है। उन्होंने महिला आरक्षण, परिसीमन और एफसीआरए संशोधन विधेयक जैसे मुद्दों पर भी सरकार को घेरते हुए कहा कि विपक्ष इन विषयों पर स्पष्ट चर्चा चाहता है।
राज्यसभा में विपक्षी सदस्यों ने ‘तानाशाही नहीं चलेगी’ जैसे नारे लगाए, जबकि लोकसभा में भी लगातार हंगामा होता रहा। अध्यक्षों की अपील के बावजूद व्यवस्था बहाल नहीं हो सकी, जिसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही पहले स्थगित की गई और बाद में दोपहर 2 बजे तक टाल दी गई।
कांग्रेस ने 10, 11 और 12 अगस्त के लिए अपने सांसदों को तीन लाइन का व्हिप जारी कर सदन में अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पार्टी ने INDIA गठबंधन के सहयोगी दलों से भी इन दिनों अपने सांसदों की पूर्ण उपस्थिति बनाए रखने का आग्रह किया है।
मानसून सत्र समाप्त होने में अब केवल चार दिन शेष हैं। ऐसे में महिला आरक्षण, परिसीमन और एफसीआरए संशोधन विधेयक सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा और विधायी प्रक्रिया को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सोमवार के कार्यसूची में इन विधेयकों को शामिल नहीं किए जाने से विपक्ष ने सरकार की मंशा पर भी सवाल उठाए।