कोर्ट से लौट रहे युवक पर चलाई थी गोली, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर एक आरोपी बरी
राजनांदगांव। वर्ष 2016 में कोर्ट से पेशी के बाद घर लौट रहे घनश्याम विश्वकर्मा पर गोली चलाने के मामले में अदालत ने करीब 10 साल बाद फैसला सुनाया है। तृतीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ज्योति अग्रवाल की अदालत ने नितिन लिम्बो उर्फ मुंकू नेपाली, दिनेश कुमार माहेश्वरी उर्फ गोलू मारवाड़ी और भरत साहू को दोषी ठहराते हुए सश्रम उम्रकैद की सजा सुनाई। वहीं, मुख्य आरोपियों को घर में शरण देने के आरोप से घिरे विनोद यादव को पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।

अभियोजन के अनुसार, 21 नवंबर 2016 को घनश्याम विश्वकर्मा अपने साथी दीपक राजपूत के साथ बाइक से कोर्ट में पेशी के बाद घर लौट रहे थे। इंदिरा नगर चौक के पास तीनों आरोपियों ने उन्हें रोक लिया। आरोप है कि इसी दौरान नितिन लिम्बो ने देशी कट्टे से घनश्याम पर फायर कर दिया। गोली उनके दाहिने कंधे के पीछे लगी और वे गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद उन्हें उपचार के लिए अस्पताल पहुंचाया गया।

मामले की रिपोर्ट घनश्याम के भाई संतोष विश्वकर्मा ने बसंतपुर थाने में दर्ज कराई थी। पुलिस ने जांच के दौरान आरोपियों को गिरफ्तार कर देशी कट्टा, कार सहित अन्य वाहन जब्त किए थे। इसके बाद प्रकरण न्यायालय में विचारण के लिए प्रस्तुत किया गया।
अदालत ने नितिन लिम्बो और दिनेश कुमार माहेश्वरी को धारा 307/34 और 120-बी/34 के तहत सश्रम उम्रकैद तथा जुर्माने की सजा सुनाई। नितिन को आर्म्स एक्ट की धारा 25(1-बी)ए में 1 वर्ष और धारा 27 में 7 वर्ष की सश्रम सजा भी दी गई। भरत साहू को धारा 307/34 और 120-बी/34 के तहत सश्रम उम्रकैद और जुर्माने की सजा सुनाई गई।
वहीं, विनोद यादव पर आरोप था कि उसने मुख्य आरोपियों को अपने घर में शरण दी थी। न्यायालय ने उसके खिलाफ आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए, जिसके बाद उसे मामले से बरी कर दिया गया।