जनवरी 2024 में जेल भेजे जाने के बाद बिगड़ी थी तबीयत, सिम्स में हुई मौत; परिजनों ने पुलिस पर मारपीट का आरोप लगाया, कोर्ट ने ₹25 लाख अंतरिम मुआवजे का आदेश दिया
बिलासपुर। जनवरी 2024 में हिरासत के बाद हुई श्रवण सूर्यवंशी उर्फ सरवन तामरे की मौत के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने हत्या की FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के 12 अगस्त 2026 के आदेश के बाद हुई है। CBI ने 30 जुलाई को सिविल लाइंस थाने में दर्ज FIR को अपनी जांच का आधार बनाया है। मामले में फिलहाल आरोपियों के नाम अज्ञात दर्ज हैं। सुप्रीम कोर्ट ने CBI को 13 अक्टूबर की अगली सुनवाई से पहले जांच रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है।
हिरासत के बाद जेल भेजा गया था श्रवण
मोहरा गांव निवासी 35 वर्षीय श्रवण सूर्यवंशी खेती-किसानी करता था। पुलिस के मुताबिक उसे 17 जनवरी 2024 को हिरासत में लिया गया था। 18 जनवरी को 6 लीटर महुआ शराब के साथ गिरफ्तारी दिखाते हुए आबकारी एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया। 19 जनवरी को उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से जेल भेज दिया गया।
जेल में बिगड़ी तबीयत, सिम्स में मौत
20 जनवरी को परिजन जेल में उससे मिलने पहुंचे, लेकिन मुलाकात नहीं हो सकी। अगले दिन 21 जनवरी को श्रवण की तबीयत बिगड़ गई। पहले जेल अस्पताल में उपचार दिया गया और हालत गंभीर होने पर सिम्स रेफर किया गया। 22 जनवरी को इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। जेल प्रबंधन के मुताबिक उसे सांस लेने में परेशानी थी।
न्यायिक जांच में सिर की चोट का उल्लेख
22 जुलाई 2024 को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी निकसन डेविड लकड़ा ने जांच रिपोर्ट सौंपी थी। पोस्टमॉर्टम, हिस्टोपैथोलॉजी और FSL रिपोर्ट समेत अन्य दस्तावेजों की जांच की गई। रिपोर्ट में शरीर में किसी रासायनिक जहर की पुष्टि नहीं हुई। मेडिकल रिपोर्ट में सिर में लगी चोट के चलते कार्डियो-रेस्पिरेटरी अरेस्ट को मौत की वजह बताया गया था।
CBI खंगाल रही पुलिस और जेल अधिकारियों की भूमिका
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर CBI यह पता लगा रही है कि श्रवण की हिरासत में मौत किन परिस्थितियों में हुई। जांच में पुलिस और जेल अधिकारियों की भूमिका भी देखी जा रही है। कोर्ट ने कहा है कि यदि कोई अधिकारी हिरासत में हिंसा के लिए जिम्मेदार पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
CBI टीम ने थाने और जेल से रिकॉर्ड जुटाए
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 15 अगस्त को CBI की चार सदस्यीय टीम बिलासपुर पहुंची थी। SP रैंक के अधिकारी के नेतृत्व वाली टीम ने सिविल लाइंस थाने से केस डायरी और अन्य दस्तावेज लिए। इसके बाद सेंट्रल जेल पहुंचकर जेल अधीक्षक और स्टाफ से पूछताछ की गई।
परिवार को ₹25 लाख अंतरिम मुआवजा
सुप्रीम कोर्ट ने मृतक के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से 25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा देने का निर्देश दिया है। अंतिम मुआवजे की राशि बाद में तय की जाएगी। CBI को अब 13 अक्टूबर की सुनवाई से पहले अपनी जांच रिपोर्ट कोर्ट के समक्ष रखनी होगी।