प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में सीएम साय ने राष्ट्रीय मंच पर रखा छत्तीसगढ़ का जल संरक्षण मॉडल; पांच जिले भी टॉप-10 में, पानी की कमी वाले ब्लॉक 26 से घटकर 19 हुए
रायपुर। बारिश के पानी को गांव और खेतों में रोककर भू-जल स्तर बढ़ाने की दिशा में छत्तीसगढ़ ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। जल शक्ति मंत्रालय के ‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के तीसरे चरण में छत्तीसगढ़ देश में पहले स्थान पर रहा है। राज्य के पांच जिले सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम भी देश के शीर्ष 10 जिलों में शामिल हुए हैं।
नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में आयोजित जल शक्ति मंत्रालय के विभागीय शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के लिए किए जा रहे कार्यों और जनभागीदारी आधारित मॉडल की जानकारी साझा की। सम्मेलन के ‘कैच द रेन’ सत्र में उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने वर्षा जल संचयन, भू-जल पुनर्भरण और पेयजल स्रोतों के संरक्षण को लेकर प्रदेश में चल रहे प्रयासों का ब्यौरा दिया।
जल संरक्षण को बनाया जनअभियान
मुख्यमंत्री साय ने कहा कि प्रदेश में जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखा गया है। किसानों, ग्राम पंचायतों, जल सखियों, जल मित्रों और स्थानीय समुदायों को अभियान से जोड़ा गया है। इससे जल संरक्षण को जनभागीदारी का व्यापक स्वरूप मिला है।
उन्होंने कहा कि किसान परिवार से होने के कारण वे खेती में पानी की अहमियत को करीब से समझते हैं। किसान के लिए पानी उसकी फसल, परिवार और आजीविका से जुड़ा है। इसलिए प्रदेश में जल संरक्षण की रणनीति के केंद्र में गांव और किसान को रखा गया है।
किसानों ने आगे बढ़ाया कोरिया का 5 प्रतिशत मॉडल
मुख्यमंत्री ने कोरिया जिले में शुरू हुए ‘5 प्रतिशत मॉडल’ को जल संरक्षण में जनभागीदारी का उदाहरण बताया। इसके तहत किसान अपनी कृषि भूमि का करीब पांच प्रतिशत हिस्सा वर्षा जल संचयन और भू-जल पुनर्भरण के लिए स्वेच्छा से उपलब्ध करा रहे हैं।
इस भूमि पर ऐसी संरचनाएं तैयार की जा रही हैं, जिनसे बारिश का पानी खेत से बाहर बहने के बजाय वहीं रुक सके और धीरे-धीरे जमीन के भीतर पहुंचे। इसमें किसान, पंचायत, स्थानीय समुदाय और विभिन्न विभाग मिलकर काम कर रहे हैं।
जल संरचनाओं की जियो-टैगिंग, नियमित निगरानी और प्रगति की समीक्षा भी अभियान का हिस्सा है। गांवों में जल सखी और जल मित्र लोगों को जल संरक्षण के लिए प्रेरित कर रहे हैं।
तीसरे चरण में 79 हजार से ज्यादा संरचनाएं दर्ज
‘जल संचय जन भागीदारी’ अभियान के पहले चरण में प्रदेश में 4 लाख 5 हजार 561 जल संरचनाएं बनाई गईं। इस चरण में छत्तीसगढ़ देश में दूसरे स्थान पर रहा था।
दूसरे चरण में 24 लाख 7 हजार 456 जल संरचनाएं दर्ज की गईं। इनमें 23 लाख 7 हजार 768 संरचनाओं का काम पूरा हो चुका है। इस चरण में भी प्रदेश दूसरे स्थान पर रहा।
तीसरे चरण JSJB 3.0 में छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान हासिल किया है। इस चरण में 79 हजार 775 जल संरचनाएं दर्ज हुई हैं, जिनमें 77 हजार 719 का काम पूरा हो चुका है।
पांच जिले राष्ट्रीय टॉप-10 में
राज्य की उपलब्धि के साथ जिलों ने भी बेहतर प्रदर्शन किया है। सूरजपुर, महासमुंद, बालोद, बलौदाबाजार-भाटापारा और कबीरधाम ने देश के शीर्ष 10 जिलों में जगह बनाई है। इन जिलों में गांव और पंचायत स्तर पर वर्षा जल संचयन तथा भू-जल पुनर्भरण के कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाई गई है।
जल संरक्षण का दिख रहा असर
प्रदेश में जल संरक्षण के प्रयासों का असर भू-जल स्थिति में भी दिखाई दे रहा है। पानी की कमी वाले ब्लॉकों की संख्या 26 से घटकर 19 रह गई है। वहीं पांच क्रिटिकल ब्लॉकों के सामान्य श्रेणी में आने का अनुमान है।
पुराने जल स्रोतों के संरक्षण, नई जल संरचनाओं के निर्माण, भू-जल पुनर्भरण, मैपिंग और नियमित निगरानी को अभियान में प्राथमिकता दी जा रही है।
हर राज्य के लिए अलग कैच द रेन प्लान का सुझाव
मुख्यमंत्री साय ने राष्ट्रीय सम्मेलन में सुझाव दिया कि हर राज्य अपनी भौगोलिक परिस्थितियों, बारिश के स्वरूप और भू-जल की स्थिति के अनुसार अलग ‘कैच द रेन प्लान’ तैयार करे। उन्होंने बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों के लिए ‘स्टेट वाटर अवार्ड्स’ शुरू करने का सुझाव भी दिया।
इसके अलावा BISAG-N के माध्यम से जल संरचनाओं की मैपिंग मजबूत करने और मुख्य सचिव की अध्यक्षता में हर तीन महीने में अभियान की समीक्षा करने की बात कही।
देश में 31 मई 2027 तक दो करोड़ नई जल संरचनाएं बनाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक, नियमित निगरानी और जनभागीदारी के समन्वय से जल संरक्षण के इस लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।