नहरपारा में लेटे हुए हनुमान की तर्ज पर गणेश प्रतिमा, रामसागरपारा में भालू पर सवार बाल गणेश; रिद्धि-सिद्धि संग दूल्हे के रूप में भी नजर आए बप्पा
रायपुर। गणेशोत्सव के रंग में रंगे रायपुर में इस बार पंडालों और गणेश प्रतिमाओं ने श्रद्धा के साथ रचनात्मकता की भी अलग छाप छोड़ी है। शहर के अलग-अलग इलाकों में कहीं विशाल प्रतिमाएं लोगों का ध्यान खींच रही हैं तो कहीं धार्मिक प्रसंगों को अनोखे अंदाज में मूर्त रूप दिया गया है। नहरपारा में करीब 20 फीट लंबे लेटे हुए गणपति आकर्षण का केंद्र हैं, तो रामसागरपारा में बाल गणेश को विशाल सफेद भालू पर सवार दिखाया गया है। वहीं, अश्वनी नगर में हॉरर थीम का पंडाल लोगों के लिए कौतूहल का विषय बना हुआ है।
नहरपारा में 20 फीट के लेटे गणपति
रेलवे स्टेशन के पास नहरपारा में श्री जनजागृति गणेश उत्सव समिति ने इस बार प्रयागराज के प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर से प्रेरित प्रतिमा तैयार कराई है। करीब 20 फीट लंबी प्रतिमा में भगवान गणेश को लेटी हुई मुद्रा में दर्शाया गया है। सिंदूरी रंग में सजी प्रतिमा पर मुकुट, आभूषण और अन्य पारंपरिक सजावट की गई है।
समिति के सदस्य मोहित कुकरेजा के अनुसार प्रतिमा का स्वरूप श्रद्धालुओं को अलग अनुभव देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। रात में रोशनी के बीच विशाल प्रतिमा का स्वरूप और भी आकर्षक दिखाई देता है।

सफेद भालू पर सवार बाल गणेश
रामसागरपारा में इस बार बच्चों को ध्यान में रखकर स्नो थीम तैयार की गई है। यहां भगवान गणेश को बाल स्वरूप में एक विशाल सफेद भालू पर बैठे हुए दिखाया गया है। भालू के साथ उसके छोटे शावकों को भी प्रतिमा का हिस्सा बनाया गया है। बर्फीले वातावरण जैसी सजावट इसे सामान्य गणेश पंडालों से अलग रूप देती है।
भगवान शिव की हथेली पर विराजे गणेश
पंडरी कपड़ा मार्केट में गणेश प्रतिमा को भगवान शिव के साथ जोड़ा गया है। यहां भगवान शिव की हथेली पर गणेश जी को विश्राम की मुद्रा में दिखाया गया है। शिव के हाथ में रुद्राक्ष की माला है, जबकि गणेश जी लाल वस्त्रों में नजर आ रहे हैं।
दूल्हे के रूप में बप्पा, साथ में रिद्धि-सिद्धि
रेलवे स्टेशन रोड पर गणेश प्रतिमा को विवाह प्रसंग से जोड़ा गया है। यहां बप्पा पारंपरिक दूल्हे के रूप में सजे हैं, जबकि रिद्धि-सिद्धि को लाल लहंगे और चुनरी में वधु के रूप में प्रस्तुत किया गया है। पूरी प्रतिमा को पारंपरिक धार्मिक स्वरूप में तैयार किया गया है।

बैरन बाजार में लालबाग के राजा का अंदाज
बैरन बाजार स्थित आशीर्वाद भवन के पास इस बार मुंबई के प्रसिद्ध लालबाग के राजा की शैली से प्रेरित गणेश प्रतिमा स्थापित की गई है। विशाल सिंहासन पर विराजमान गणेश जी के सिर पर मराठा शैली की पगड़ी है। माथे पर ‘जय भवानी’ लिखा तिलक प्रतिमा को अलग पहचान दे रहा है।
शेषनाग के फन के नीचे बप्पा
गुरुनानक चौक के पास सजाई गई झांकी में भगवान गणेश को शेषनाग पर विराजमान दिखाया गया है। फूलों और रंगीन रोशनी से सजी इस झांकी में शेषनाग को गतिशील रूप दिया गया है। काले रंग के गणेश स्वरूप पर स्वर्ण मुकुट और सूंड पर लाल रंग का संयोजन विशेष आकर्षण पैदा करता है।

नवरत्नों से सजा गणेश स्वरूप
आजाद चौक से मोमिनपारा रोड के बीच स्थापित गणेश प्रतिमा में बप्पा का विशेष श्रृंगार किया गया है। मुकुट और कानों में नवरत्न लगाए गए हैं। आशीर्वाद की मुद्रा में विराजमान प्रतिमा रोशनी के बीच बेहद आकर्षक नजर आती है।
दो मुखों में शिव-विष्णु का संदेश
तात्यापारा चौक में द्विमुखी गणेश प्रतिमा लोगों का ध्यान खींच रही है। इसे शिव-विष्णु स्वरूप की अवधारणा पर तैयार किया गया है। प्रतिमा के दोनों हिस्सों में अलग-अलग रंगों का प्रयोग किया गया है। नीला रंग विष्णु स्वरूप से, जबकि हरा रंग शिव, प्रकृति और सौम्यता से जोड़ा गया है। प्रतिमा के माध्यम से प्रकृति और शक्ति के संतुलन का संदेश देने की कोशिश की गई है।
नरसिंह की गोद में बाल गणेश
फूल चौक में भगवान नरसिंह और बाल गणेश की झांकी तैयार की गई है। इसमें नरसिंह भगवान बाल गणेश को अपनी गोद में थामे हुए नजर आते हैं। वात्सल्य और संरक्षण के भाव को दर्शाती यह प्रतिमा श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई है।
वीणा बजाते गणेश और प्रकृति का संसार
अश्वनी नगर में गणेश झांकी को जंगल, जल, हरियाली और संगीत की थीम पर तैयार किया गया है। यहां गणेश जी को हाथ में वीणा लिए संगीत की मुद्रा में दिखाया गया है। आसपास नृत्य करती गोपियों की प्रतिमाएं बनाई गई हैं। पेड़-पौधों, बेलों, घास और प्राकृतिक सजावट से पूरे पंडाल को जंगल जैसा स्वरूप दिया गया है।
भूत-प्रेत थीम ने बढ़ाया कौतूहल
अश्वनी नगर के एक अन्य गणेश पंडाल में इस बार धार्मिक सजावट से हटकर हॉरर थीम तैयार की गई है। प्रवेश करते ही अंधेरा और डरावना वातावरण नजर आता है। पंडाल में कब्रों, लटकी हुई डरावनी आकृतियों और भूतों के दृश्य बनाए गए हैं। साउंड इफेक्ट के जरिए माहौल को और रहस्यमय बनाया गया है। गणेशोत्सव के दौरान यह थीम विशेष रूप से युवाओं और बच्चों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।