जनवरी-अगस्त में 178 लोगों ने गंवाई जान, सितंबर में 6 मौतें; जेवरा-सिरसा, नंदिनी रोड, हथखोज और ट्रांसपोर्ट नगर में बेतरतीब पार्किंग से बढ़ रहा खतरा
दुर्ग-भिलाई। दुर्ग जिले में सड़क हादसों में मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। जनवरी से अगस्त 2026 तक 178 लोगों की सड़क दुर्घटनाओं में जान जा चुकी है। सितंबर में अब तक 6 और मौतें होने से यह आंकड़ा 184 तक पहुंच गया है। लगातार हो रहे हादसों में तेज रफ्तार के साथ सड़क किनारे खड़े भारी वाहन और अचानक सड़क पर आ जाने वाले मवेशी भी बड़ी वजह के रूप में सामने आ रहे हैं। कई मार्गों पर ट्रक, ट्रेलर और ट्रैक्टर सड़क के किनारे इस तरह खड़े रहते हैं कि रात के समय वाहन चालकों को उन्हें समय रहते देख पाना मुश्किल हो जाता है।
पिछले कुछ दिनों में हुए हादसों ने एक बार फिर सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। 12 सितंबर को उरला बाईपास पर खड़े ट्रेलर से बाइक टकराने से योगेश कुमार साहू की मौत हुई। 15 सितंबर को झीट-मोतीपुर क्षेत्र में दो अलग-अलग घटनाओं में दो लोगों की जान चली गई। एक हादसे में बाइक के सामने अचानक गाय आ गई, जबकि दूसरे में बाइक सड़क किनारे लगी फेंसिंग से टकरा गई।
खड़े वाहनों से बढ़ रहा हादसों का खतरा
जेवरा-सिरसा, नंदिनी रोड, हथखोज, ट्रांसपोर्ट नगर-सिकोला और राष्ट्रीय राजमार्ग के आसपास सड़क किनारे भारी वाहनों की पार्किंग की समस्या बनी हुई है। औद्योगिक क्षेत्रों से लगातार आने-जाने वाले ट्रकों और ट्रेलरों के कारण इन मार्गों पर यातायात का दबाव भी अधिक रहता है। सड़क पर जगह कम होने से दोपहिया और छोटे वाहन चालकों को खड़े भारी वाहनों को पार करने के लिए अचानक लेन बदलनी पड़ती है।
रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है। यदि सड़क किनारे खड़े ट्रक या ट्रेलर में पर्याप्त रिफ्लेक्टर, पार्किंग लाइट या चेतावनी संकेत नहीं हैं तो पीछे से आने वाले वाहन चालक को उसकी मौजूदगी का अंदाजा देर से होता है। उरला बाईपास का हालिया हादसा इसी खतरे की ओर इशारा करता है।
12 सितंबर को खड़े ट्रेलर से टकराई बाइक
मोहन नगर थाना क्षेत्र के उरला बाईपास पर 12 सितंबर की रात करीब 8:35 बजे कादंबरी नगर निवासी 33 वर्षीय योगेश कुमार साहू बाइक से कोटनी से दुर्ग लौट रहे थे। टोल प्लाजा के पास उनकी बाइक सड़क पर खड़े ट्रेलर से जा भिड़ी। गंभीर रूप से घायल योगेश को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने जांच के बाद ट्रेलर चालक के खिलाफ बीएनएस की धारा 106(1) और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत मामला दर्ज किया।
गाय से बचने की कोशिश में भी जा रही जान
सड़क पर घूमते मवेशी भी दुर्घटनाओं का बड़ा कारण बन रहे हैं। 15 सितंबर को झीट क्षेत्र में बाइक के सामने अचानक गाय आ गई। चालक उसे बचाने का प्रयास कर रहा था, इसी दौरान बाइक गाय से टकरा गई। हादसे में बाइक सवार की मौत हो गई और गाय की भी जान चली गई।
शहर के अलावा ग्रामीण और औद्योगिक इलाकों को जोड़ने वाली सड़कों पर यह समस्या ज्यादा दिखाई देती है। अचानक सामने आए मवेशी से बचने के प्रयास में दोपहिया वाहन चालक संतुलन खो देते हैं और पीछे से आ रहे वाहनों की चपेट में आने का खतरा भी बढ़ जाता है।
कुम्हारी में खड़े ट्रैक्टर से टकराकर चार की मौत
16 जुलाई को कुम्हारी क्षेत्र में राष्ट्रीय राजमार्ग पर सड़क किनारे खड़े ऑक्सीजन सिलेंडर लदे ट्रैक्टर से स्कूटी टकरा गई थी। हादसे में चार लोगों की मौत हुई और एक बच्चा घायल हुआ। बताया गया था कि ट्रैक्टर अक्सर सड़क किनारे खड़ा किया जाता था। हाईवे जैसे तेज यातायात वाले मार्ग पर भारी वाहन की सुरक्षित पार्किंग और पर्याप्त चेतावनी संकेत नहीं होने पर दुर्घटना का खतरा बढ़ जाता है।
इन इलाकों में पार्किंग बड़ी चुनौती
जेवरा-सिरसा मार्ग पर भारी वाहनों का दबाव अधिक है। सड़क किनारे खड़े ट्रकों के कारण वाहनों को अपनी लेन बदलकर निकलना पड़ता है। नंदिनी रोड पर औद्योगिक क्षेत्रों से आने-जाने वाले मालवाहक वाहनों की संख्या अधिक होने से पार्किंग का दबाव बना रहता है।
हथखोज में औद्योगिक गतिविधियों के कारण दिन-रात भारी वाहनों की आवाजाही रहती है। ट्रांसपोर्ट नगर और सिकोला में लोडिंग-अनलोडिंग के लिए सड़क किनारे खड़े वाहन सामान्य यातायात को प्रभावित करते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग पर तेज रफ्तार के कारण ऐसी स्थिति और जोखिमपूर्ण हो जाती है।
पुलिस के आंकड़ों में पिछले साल से कमी
हालांकि पुलिस के आंकड़ों के अनुसार सड़क दुर्घटनाओं में मौत का आंकड़ा पिछले साल की तुलना में कम हुआ है। जनवरी से अगस्त 2025 के दौरान 247 लोगों की सड़क हादसों में मौत हुई थी, जबकि इसी अवधि में 2026 में यह संख्या 178 रही। पुलिस के अनुसार हेलमेट और सीट बेल्ट की जांच, शराब पीकर वाहन चलाने वालों पर कार्रवाई तथा ब्लैक स्पॉट और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में निगरानी से हादसों में कमी आई है।
इसके बावजूद सितंबर में हुई लगातार मौतों ने सड़क किनारे पार्किंग, मवेशियों और यातायात निगरानी को लेकर नए सिरे से चिंता बढ़ाई है। हादसों की संख्या कम करने के लिए कार्रवाई के साथ-साथ उन स्थानों पर नियमित निगरानी की जरूरत है, जहां सड़क पर खड़े भारी वाहन और मवेशी बार-बार दुर्घटनाओं का कारण बन रहे हैं।