सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर हाई कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा, 90 दिन में पूरी करनी होगी नियुक्ति प्रक्रिया
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में पुलिस आरक्षक भर्ती की प्रतीक्षा सूची में शामिल 400 से अधिक अभ्यर्थियों के लिए लंबे इंतजार के बाद नियुक्ति का रास्ता साफ हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के उस फैसले को कायम रखा है, जिसमें वेटिंग लिस्ट से रिक्त पदों पर नियुक्ति का निर्देश दिया गया था। सर्वोच्च न्यायालय ने संबंधित प्रक्रिया 90 दिनों के भीतर पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
2017 में निकली थी 2259 पदों पर भर्ती
राज्य में पुलिस आरक्षक जीडी सहित अन्य पदों पर भर्ती के लिए वर्ष 2017 में 2259 पदों का विज्ञापन जारी किया गया था। भर्ती प्रक्रिया के बाद प्रतीक्षा सूची 1 मार्च 2021 को जारी की गई थी। सूची में शामिल अभ्यर्थी लंबे समय से नियमों के तहत रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग कर रहे थे।
सरकार की ओर से नियुक्ति की दिशा में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने पर परसराम ध्रुव सहित अन्य अभ्यर्थियों ने वर्ष 2023 में हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाई कोर्ट ने नियम 13(2) को माना आधार
मामले की सुनवाई के बाद हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने 1 फरवरी 2024 को अभ्यर्थियों के पक्ष में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने छत्तीसगढ़ पुलिस कार्यपालिक बल नियुक्ति तथा सेवा शर्ते नियम 2007 के नियम 13(2) का उल्लेख करते हुए कहा था कि नया पद स्वीकृत होने अथवा पदोन्नति, सेवानिवृत्ति, मृत्यु सहित अन्य कारणों से पद रिक्त होने की स्थिति में निर्धारित प्रक्रिया के तहत प्रतीक्षा सूची से नियुक्ति की जा सकती है।
डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के उस आदेश को भी निरस्त कर दिया था, जिसमें प्रतीक्षा सूची की अवधि के दौरान पदोन्नति या मृत्यु से रिक्त हुए पदों पर वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने से इनकार किया गया था।
राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दी थी चुनौती
हाई कोर्ट के इस निर्णय के खिलाफ राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस संजीव खन्ना की डिवीजन बेंच ने की। सभी पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने राज्य सरकार की याचिका खारिज कर दी और हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा।
अभ्यर्थियों की ओर से सीनियर एडवोकेट नौशीना आफरीन अली, एडवोकेट अभिजीत श्रीवास्तव और एओआर अंशुमन श्रीवास्तव ने पक्ष रखा। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अब प्रतीक्षा सूची में शामिल 400 से अधिक अभ्यर्थियों की नियुक्ति प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा में पूरी किए जाने की उम्मीद है।