जीएसटी काउंसिल की 7 अक्टूबर की बैठक में फैसला संभव; आपराधिक कार्रवाई की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ करने का प्रस्ताव
जीएसटी व्यवस्था में कारोबारियों को राहत देने की दिशा में एक बड़ा बदलाव प्रस्तावित है। 7 अक्टूबर को होने वाली जीएसटी काउंसिल की बैठक में टैक्स अधिकारियों की गिरफ्तारी संबंधी शक्तियों में बदलाव पर विचार किया जा सकता है। प्रस्ताव के मुताबिक किसी व्यक्ति को गिरफ्तार करने से पहले न्यायिक मंजूरी लेना अनिवार्य होगा। साथ ही टैक्स चोरी या फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट से जुड़े मामलों में आपराधिक कार्रवाई की सीमा 1 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए करने की सिफारिश की गई है।
नई दिल्ली (ए)। सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में बदलाव के बाद अब सरकार टैक्स प्रशासन के दूसरे चरण में सुधारों पर ध्यान दे रही है। इसे ‘नेक्स्ट जनरेशन जीएसटी’ के तहत प्रशासन को सरल बनाने और कारोबारियों के लिए अनुपालन व्यवस्था को अधिक सहज करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।
प्रस्तावित बदलाव में सबसे महत्वपूर्ण संशोधन सीजीएसटी एक्ट की धारा 69 से जुड़ा है। मौजूदा व्यवस्था में कमिश्नर स्तर की अनुमति के बाद जीएसटी अधिकारी गंभीर टैक्स अपराध के मामलों में किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकते हैं। प्रस्ताव लागू होने पर यह अधिकार सीधे अधिकारियों के पास नहीं रहेगा और गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी होगी।
5 करोड़ से कम के मामलों में आपराधिक कार्रवाई की सीमा बढ़ेगी
वर्तमान व्यवस्था में 1 करोड़ रुपए से अधिक की टैक्स चोरी या फर्जी आईटीसी जैसे मामलों में आपराधिक कार्रवाई का प्रावधान है। प्रस्ताव के अनुसार इस सीमा को बढ़ाकर 5 करोड़ रुपए किया जा सकता है। इसका अर्थ होगा कि 5 करोड़ रुपए से कम के मामलों को सामान्य तौर पर आपराधिक मुकदमे के बजाय टैक्स वसूली की प्रक्रिया के तहत निपटाया जाएगा।
हर टैक्स विवाद को अपराध नहीं माना जाएगा
क्लासिफिकेशन, वस्तु या सेवा के मूल्यांकन और इनपुट टैक्स क्रेडिट जैसे सामान्य कर विवादों को आपराधिक मामलों से अलग रखने का प्रस्ताव है। कारोबार और टैक्स विभाग के बीच किसी लेन-देन की व्याख्या को लेकर मतभेद होने मात्र से उसे आपराधिक अपराध नहीं माना जाएगा।
गंभीर धोखाधड़ी पर कार्रवाई जारी रहेगी
गिरफ्तारी की प्रक्रिया बदलने का मतलब गंभीर टैक्स चोरी या जानबूझकर किए गए फर्जीवाड़े पर कार्रवाई खत्म होना नहीं है। बड़े और गंभीर अपराधों में अदालत के माध्यम से मुकदमा चलाने की व्यवस्था बनी रहेगी। प्रस्ताव में 24 आपराधिक प्रावधानों में से 9 को हटाने और 11 को बनाए रखने की बात कही गई है।
इसके अलावा न्यूनतम जेल की अनिवार्यता खत्म कर अदालत को केवल जुर्माना लगाने का विकल्प देने पर भी विचार किया जा रहा है। मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा 3 साल से घटाकर 2 साल करने का प्रस्ताव भी शामिल है।
टैक्स वसूली की शक्तियां बनी रहेंगी
अधिकारियों की गिरफ्तारी की शक्ति में बदलाव होने के बावजूद सरकार की टैक्स वसूली, ब्याज और पेनल्टी लगाने की शक्तियां खत्म नहीं होंगी। छोटे और नियमित मामलों में करदाता बकाया टैक्स, ब्याज और जुर्माना जमा कर मामले का निपटारा कर सकेंगे।
टेक्नोलॉजी आधारित निगरानी पर जोर
जीएसटी व्यवस्था लागू होने के शुरुआती दौर में फर्जी बिल और टैक्स चोरी पकड़ने के लिए अधिकारियों की प्रवर्तन शक्तियों पर अधिक निर्भरता थी। अब इनवॉइस मैचिंग, डेटा एनालिटिक्स और ऑटोमेटेड सिस्टम के मजबूत होने से फर्जी लेन-देन की पहचान पहले ही की जा सकती है।
प्रस्तावित बदलाव का उद्देश्य टैक्स प्रशासन को गिरफ्तारी आधारित व्यवस्था से हटाकर डेटा, तकनीक और सिविल रिकवरी पर अधिक केंद्रित करना है। इससे कारोबारियों के बीच अनुपालन को लेकर भरोसा बढ़ाने और ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बेहतर करने की उम्मीद है।