चंद्रदेव राय और विनोद तिवारी कोर्ट पहुंचे; जांच में 170 करोड़ की बेनामी संपत्ति जब्त, EOW ने पैसों के लेनदेन और संपत्ति से जुड़े दस्तावेज जुटाए
छत्तीसगढ़ के कथित 570 करोड़ रुपए के कोल लेवी घोटाले में आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो सोमवार को स्पेशल कोर्ट में अंतिम आरोप पत्र पेश करने जा रहा है। मामले में 9 आरोपियों को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किए गए हैं। पूर्व विधायक चंद्रदेव राय और कांग्रेस नेता विनोद तिवारी कोर्ट पहुंच चुके हैं। जांच एजेंसी का दावा है कि अवैध वसूली की रकम का हिस्सा नेताओं और अफसरों तक पहुंचा और अब तक करीब 170 करोड़ रुपए की कथित बेनामी संपत्ति जब्त की जा चुकी है।
रायपुर। 570 करोड़ रुपए के कथित कोल लेवी घोटाले की जांच अब अंतिम आरोप पत्र के चरण में पहुंच गई है। EOW सोमवार को मामले में स्पेशल कोर्ट के समक्ष अंतिम चार्जशीट दाखिल करेगी। इसके साथ ही जांच के दौरान सामने आए पैसों के लेनदेन, संपत्तियों और आरोपियों की भूमिका से जुड़े साक्ष्यों को अदालत के सामने रखा जाएगा।
मामले में 9 आरोपियों को 5 अक्टूबर को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किए गए हैं। इनमें कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक चंद्रदेव राय, रामगोपाल अग्रवाल, IAS जयप्रकाश मौर्य और दीपेश टांक समेत अन्य आरोपी शामिल हैं। पूर्व विधायक चंद्रदेव राय और कांग्रेस नेता विनोद तिवारी अदालत पहुंच चुके हैं।
EOW के अनुसार जांच में नेताओं को कथित तौर पर 65 करोड़ रुपए से अधिक और अधिकारियों को 36 करोड़ रुपए से ज्यादा की रकम मिलने के साक्ष्य सामने आए हैं। एजेंसी का दावा है कि मामले की जांच के दौरान करीब 170 करोड़ रुपए की बेनामी संपत्तियां जब्त की गई हैं।
जांच एजेंसी के अनुसार ऐसे चलता था वसूली का नेटवर्क
ED की चार्जशीट के मुताबिक, कोल लेवी की रकम कोयला कारोबार से जुड़े लोगों से वसूली जाती थी। आरोप है कि कोल वाशरी संचालकों से 100 रुपए प्रति टन और वाशरी से बाहर निकलने वाले कोयले पर अतिरिक्त 25 रुपए प्रति टन ट्रांसपोर्टिंग शुल्क लिया जाता था।
जांच के अनुसार कोरबा और रायगढ़ में वसूली के लिए अलग-अलग कार्यालय बनाए गए थे। वसूली गई रकम को कथित तौर पर सूर्यकांत तिवारी के नेटवर्क के जरिए संभाला जाता था। इसके बाद तय हिस्से के अनुसार रकम विभिन्न लोगों तक पहुंचाई जाती थी।
एजेंसी के मुताबिक सूर्यकांत तिवारी के कर्मचारियों में निखिल चंद्राकर की भूमिका रकम पहुंचाने में महत्वपूर्ण थी। आरोप है कि उसके माध्यम से कई लोगों तक पैसे पहुंचाए गए।
चार्जशीट में नेताओं को रकम देने के दावे
ED की चार्जशीट के अनुसार सौम्या चौरसिया ने कथित तौर पर सूर्यकांत तिवारी से 169 बार में 31 करोड़ रुपए लिए। निलंबित IAS रानू साहू के बारे में 13 बार में 5.52 करोड़ रुपए लेने का आरोप लगाया गया है।
कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव के संबंध में एजेंसी ने 11 लेनदेन में 3 करोड़ रुपए मिलने का दावा किया है। चार्जशीट में आरोप है कि इस रकम का इस्तेमाल खैरागढ़ उपचुनाव और उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के दौरान किया गया।
पूर्व विधायक चंद्रदेव राय के संबंध में भी एजेंसी ने सूर्यकांत तिवारी से दो बार में 46 लाख रुपए लेने का दावा किया है। इनमें 42 लाख रुपए उत्तर प्रदेश चुनाव में खर्च किए जाने और 4 लाख रुपए से पत्नी के लिए रायपुर की एक ज्वेलरी दुकान से 60 ग्राम सोने का हार खरीदने का आरोप है।
संपत्ति और चुनावी खर्च की भी जांच
जांच एजेंसी ने आरोपियों की संपत्ति और कथित खर्च के तरीकों को भी जांच का हिस्सा बनाया है। एजेंसी का दावा है कि कुछ आरोपियों ने कथित रकम से संपत्ति खरीदी, गहने लिए और चुनावी गतिविधियों में पैसा खर्च किया।
देवेंद्र यादव-सूर्यकांत की चैट का भी जिक्र
ED की चार्जशीट में कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव और सूर्यकांत तिवारी के बीच हुई कथित वॉट्सऐप बातचीत का भी उल्लेख है। एजेंसी ने इन बातचीत को खैरागढ़ चुनाव और मुलाकातों से जोड़ते हुए चार्जशीट में शामिल किया है।
जांच एजेंसी के अनुसार बातचीत में रायपुर पहुंचने, मिलने की जगह और समय को लेकर संदेशों का आदान-प्रदान हुआ था। इन चैट के स्क्रीनशॉट को भी जांच दस्तावेजों का हिस्सा बनाया गया है।
अब अंतिम चार्जशीट दाखिल होने के बाद अदालत के सामने जांच एजेंसी के दावों और जुटाए गए साक्ष्यों की न्यायिक समीक्षा होगी।