120 सदस्यीय संसद में बहुमत के लिए 61 सीटें जरूरी, नेतन्याहू को एक सर्वे में बढ़त तो दूसरे में बहुमत का अनुमान
तेल अवीव (ए)। इजराइल में संसदीय चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज है। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में पूर्व सेना प्रमुख गादी आइजनकोट की दावेदारी मजबूत होती दिखाई दे रही है। चुनाव से पहले सामने आए छह ओपिनियन पोल में से चार में आइजनकोट के गठबंधन को अधिक सीटें मिलने का अनुमान जताया गया है। वहीं, प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के गठबंधन को एक सर्वे में बढ़त और दूसरे में बहुमत मिलने की संभावना बताई गई है। मतदान के बीच अब सबकी निगाहें मतदाताओं की भागीदारी और अंतिम नतीजों पर टिकी हैं।
इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है, जिसमें कुल 120 सदस्य होते हैं। सरकार बनाने के लिए किसी गठबंधन को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना जरूरी है। देश की चुनावी व्यवस्था में किसी एक पार्टी के लिए अपने दम पर बहुमत हासिल करना चुनौतीपूर्ण रहा है। इजराइल के राजनीतिक इतिहास में अब तक किसी भी पार्टी को अकेले स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। ऐसे में सरकार गठन के लिए विभिन्न दलों के बीच गठबंधन अहम भूमिका निभाते हैं।
पार्टी को मिलता है वोट
इजराइल में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री का चुनाव नहीं करते, बल्कि राजनीतिक दलों को वोट देते हैं। चुनाव से पहले प्रत्येक पार्टी अपने उम्मीदवारों की सूची जारी करती है। देशभर में पार्टी को मिले कुल वोटों के अनुपात के आधार पर संसद में उसकी सीटें तय होती हैं। इसके बाद उम्मीदवारों की सूची में क्रम के अनुसार सांसद चुने जाते हैं। उदाहरण के तौर पर किसी पार्टी को 20 सीटें मिलने पर उसकी सूची में शुरुआती 20 उम्मीदवार संसद पहुंच सकते हैं।
3.25 प्रतिशत वोट हासिल करना जरूरी
संसद में प्रतिनिधित्व पाने के लिए किसी पार्टी को कुल वैध मतों में कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट प्राप्त करना अनिवार्य है। निर्धारित सीमा से कम वोट मिलने पर पार्टी को संसद में सीट नहीं मिलती। इस व्यवस्था के कारण छोटे दलों के प्रदर्शन का भी सरकार गठन पर असर पड़ सकता है। चुनावी मुकाबले में किसी गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने की स्थिति में अन्य दलों का समर्थन सत्ता की चाबी बन सकता है।