मध्य प्रदेश में सिंगरौली में रात 8:01 बजे तो आलीराजपुर में 8:41 बजे चंद्रोदय का अनुमान, भोपाल में 8:26 बजे दिख सकता है चांद
भोपाल (ए)। करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना के साथ निर्जला व्रत रखने वाली महिलाओं को इस बार चंद्र दर्शन के लिए कुछ देर इंतजार करना पड़ सकता है। मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में बादल छाए रहने और मौसम में बदलाव की संभावना के चलते चांद दिखाई देने में देरी हो सकती है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, प्रदेश में चंद्रोदय के समय में अलग-अलग जिलों के बीच करीब 40 मिनट का अंतर रहेगा। सिंगरौली में रात 8:01 बजे चांद निकलने का अनुमान है, जबकि आलीराजपुर में इसके रात 8:41 बजे दिखाई देने की संभावना है। भोपाल में चंद्रोदय का संभावित समय रात 8:26 बजे बताया गया है। ज्योतिष मठ संस्थान के अनुसार, यहां चांद 8:24 बजे भी दिखाई दे सकता है।
करवा चौथ पर महिलाएं दिनभर निर्जला व्रत रखती हैं। शाम को विधि-विधान से पूजा करने के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देती हैं और पति के हाथों जल ग्रहण कर व्रत खोलती हैं। इस दिन चंद्र दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है, इसलिए मौसम के कारण चांद दिखाई नहीं देने की स्थिति में महिलाओं के मन में पूजा को लेकर असमंजस हो सकता है।
बादल हों तो पूर्व दिशा की ओर करें प्रणाम
ज्योतिषाचार्य पं. अमर डिब्बेवाला के अनुसार, यदि बादलों के कारण चंद्रमा प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देता है, तो महिलाओं को परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। चंद्रोदय के निर्धारित समय पर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके चंद्रमा को प्रणाम किया जा सकता है। इसी दिशा की ओर अर्घ्य देकर पूजा संपन्न करने का विधान बताया गया है। ऊंची इमारतों, पहाड़ियों या घने बादलों के कारण चंद्र दर्शन में 10 से 15 मिनट की देरी भी हो सकती है।
करवा, अक्षत और सफेद फूलों से करें पूजन
करवा चौथ की पूजा में मिट्टी के करवे का विशेष महत्व होता है। इसमें जल भरकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है। पूजन के दौरान सुगंधित द्रव्य, सफेद फूल, अक्षत, भगवान गणेश और चौथ माता की आराधना की जाती है। महिलाएं पति की लंबी आयु और दांपत्य जीवन में सुख-समृद्धि की कामना के साथ पूजा करती हैं।
पहली बार व्रत रखने वाली महिलाएं भी रहें निश्चिंत
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, गुरु और शुक्र तारे के उदय-अस्त को लेकर नवविवाहित महिलाओं को इस बार संशय में रहने की जरूरत नहीं है। पहली बार करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिलाएं भी परंपरा के अनुसार पूजा कर सकती हैं। हालांकि, चंद्र दर्शन और अर्घ्य के लिए स्थानीय चंद्रोदय समय को ध्यान में रखना उचित रहेगा।