वकीलों और परिजनों ने किया प्रदर्शन, एक करोड़ मुआवजे और जिम्मेदार डॉक्टरों पर कार्रवाई की मांग; अस्पताल प्रबंधन ने कहा- इलाज में कोई चूक नहीं हुई
दुर्ग। स्मृति नगर स्थित हाईटेक सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में इलाज के दौरान महिला अधिवक्ता बलबीर कौर की मौत के बाद विवाद खड़ा हो गया। परिजनों और जिला अधिवक्ता संघ के सदस्यों ने अस्पताल प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। मामले की निष्पक्ष जांच, एक करोड़ रुपए मुआवजे और जिम्मेदार डॉक्टरों के खिलाफ एफआईआर की मांग को लेकर कलेक्टर को ज्ञापन भी सौंपा गया। दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए मरीज को बचाने के लिए हरसंभव चिकित्सा प्रयास किए जाने की बात कही है।
इलाज को लेकर उठे सवाल, अस्पताल के बाहर नारेबाजी
महिला अधिवक्ता की मौत की जानकारी मिलने के बाद परिजन और बड़ी संख्या में अधिवक्ता अस्पताल पहुंचे। आक्रोशित लोगों ने अस्पताल के बाहर प्रदर्शन करते हुए उपचार प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका आरोप है कि इलाज के दौरान बरती गई कथित लापरवाही के कारण मरीज की स्थिति बिगड़ी और आखिरकार उनकी मौत हो गई।
जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष रमेश शर्मा के नेतृत्व में संघ ने मामले की जांच की मांग उठाई। अधिवक्ताओं का कहना है कि मौत के पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि उपचार के दौरान हुई घटनाओं की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।
कलेक्टर को ज्ञापन, जांच के साथ मुआवजे की मांग
अधिवक्ता संघ ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मामले की जांच जिला चिकित्सा अधिकारी के माध्यम से कराने की मांग की है। संघ ने पीड़ित परिवार को एक करोड़ रुपए का मुआवजा देने तथा यदि जांच में किसी की लापरवाही सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है।
अस्पताल प्रबंधन ने कहा- उपचार में नहीं हुई चूक
हाईटेक अस्पताल के मेडिकल डायरेक्टर डॉ. नवील शर्मा ने इलाज में लापरवाही के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि मरीज को बचाने के लिए डॉक्टरों की टीम ने पूरी क्षमता से उपचार किया। उनका दावा है कि दवाइयां निर्धारित मात्रा में दी गई थीं और एनेस्थीसिया समेत अन्य चिकित्सा प्रक्रियाएं विशेषज्ञों की निगरानी में की गईं।
ऑपरेशन के दौरान अचानक बदली स्थिति
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक ऑपरेशन की प्रक्रिया सामान्य रूप से चल रही थी। इसी दौरान मॉनिटरिंग के दौरान मरीज की स्थिति में अचानक बदलाव दिखाई दिया। एनेस्थीसिया विशेषज्ञ ने तत्काल स्थिति का आकलन करते हुए ऑपरेशन रोक दिया। डॉक्टरों को पल्मोनरी एम्बोलिज्म यानी फेफड़ों की रक्त नली में खून का थक्का फंसने की आशंका हुई।
इसके बाद मरीज को आवश्यक दवाइयां दी गईं और सीपीआर किया गया। हालत को स्थिर करने के प्रयास के बाद उन्हें आईसीयू में शिफ्ट किया गया।
अगले दिन फिर बिगड़ी हालत, इलाज के बावजूद मौत
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार उपचार के बाद शाम को मरीज के ब्लड प्रेशर में सुधार के संकेत मिले थे। हालांकि अगले दिन सुबह करीब 6 बजे उनकी हालत फिर बिगड़ गई। डॉक्टरों ने आईसीयू में सीपीआर समेत जरूरी उपचार किया, लेकिन प्रयास सफल नहीं हो सके।
अब मामले में दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच जांच पर नजर है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि उपचार के दौरान किसी स्तर पर लापरवाही हुई थी या मरीज की गंभीर चिकित्सा जटिलता के कारण स्थिति बिगड़ी।