चैत्र नवरात्रि की नवमी तिथि पर अयोध्या में रामलला के मस्तक पर सूर्य की किरणों से होगा शुभ तिलक, 4 मिनट तक चलेगा ये दिव्य आयोजन
राम नवमी 2025 का पर्व आज पूरे देश में श्रद्धा और उल्लास से मनाया जा रहा है। खास तौर पर अयोध्या नगरी में इस दिन का विशेष महत्व है, जहां भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव पर सूर्य की किरणों से रामलला का अभिषेक किया जाएगा। यह ऐतिहासिक क्षण एक अद्भुत वैज्ञानिक तकनीक से संभव हो रहा है, जिसे लाखों श्रद्धालु टीवी पर लाइव देख सकेंगे।
अयोध्या आज एक बार फिर आध्यात्मिक ऊर्जा और दिव्यता का केंद्र बन गई है। राम नवमी 2025 के इस पावन दिन पर राम जन्मभूमि परिसर में सुबह से ही भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। श्रीराम के जन्मोत्सव को चिह्नित करने के लिए दोपहर 12 बजे रामलला का सूर्य तिलक किया जाएगा, जिसमें सूर्य की किरणें प्रतिमा के ललाट पर चार मिनट तक पड़ेंगी।
यह विशेष आयोजन एक अत्याधुनिक ऑप्टोमैकेनिकल सिस्टम के माध्यम से संभव होगा, जिससे गर्भगृह तक सूर्य की सटीक किरणें लाई जाएंगी। जैसे ही सूर्य की रोशनी रामलला के मस्तक पर पड़ेगी, वैसे ही उनका ‘सूर्य तिलक’ सम्पन्न होगा। यह प्रक्रिया दोपहर 12 बजे से शुरू होकर 12 बजकर 4 मिनट तक चलेगी।
इस भव्य आयोजन की एक और खास बात यह है कि अगले 20 वर्षों तक प्रत्येक राम नवमी पर यह सूर्य तिलक दोहराया जाएगा और हर वर्ष इसकी अवधि में वृद्धि होती जाएगी।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान श्रीराम का जन्म पुनर्वसु नक्षत्र, कर्क लग्न और अभिजीत मुहूर्त में हुआ था, जब सूर्य अपने उच्च प्रभाव में थे। तुलसीदासजी ने भी ‘रामचरितमानस’ में इस चमत्कारी क्षण का उल्लेख किया है, जब सूर्यदेव एक महीने तक अयोध्या में ठहर गए थे।
भगवान राम सूर्यवंश के गौरव हैं और सूर्यदेव उनके कुलदेवता माने जाते हैं। शास्त्रों में सूर्य को जीवन, तेज, आरोग्य और यश का स्त्रोत माना गया है। यही कारण है कि यह सूर्य तिलक न केवल एक आध्यात्मिक अनुष्ठान है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और सफलता की कामना का भी प्रतीक है।