70 याचिकाओं पर संविधान पीठ में बहस, सिब्बल ने धारा 3(सी) और 3(ए)(2) को बताया असंवैधानिक
नई दिल्ली। वक्फ संशोधित कानून के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई का आगाज़ हो गया है। मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना की अध्यक्षता में जस्टिस पीवी संजय कुमार और जस्टिस केवी विश्वनाथन की तीन जजों की पीठ इस मामले में दाखिल कुल 70 याचिकाओं पर विचार कर रही है।
सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने जोरदार दलीलें पेश करते हुए कहा कि वक्फ अधिनियम धर्म और निजी उत्तराधिकार जैसे संवेदनशील मामलों में अनुचित दखल देता है। उन्होंने धारा 3(सी) को चुनौती देते हुए कहा कि इस प्रावधान के तहत सरकारी संपत्ति को वक्फ घोषित किया जाना संविधान के अनुच्छेद 26 का उल्लंघन है, जो सभी धर्मों को स्वतंत्रता देता है।
इसके जवाब में सीजेआई ने कहा कि “अनुच्छेद 26 सभी समुदायों पर समान रूप से लागू होता है। जिस प्रकार हिंदू समुदाय के लिए राज्य ने कानून बनाए हैं, उसी तरह मुस्लिम समुदाय के लिए भी संसद ने कानून बनाया है।”
सिब्बल ने धारा 3(ए)(2) के हवाले से कहा कि वक्फ-अल-औलाद के गठन से मुस्लिम महिलाओं को विरासत के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल किया कि “इस पर रोक लगाने वाला राज्य कौन होता है?” इस पर कोर्ट ने अनुसूचित जनजातियों की संपत्ति पर भी नियंत्रण संबंधी कानूनों का उदाहरण दिया।
सुनवाई में सिब्बल के साथ-साथ असदुद्दीन ओवैसी, अभिषेक मनु सिंघवी और सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता जैसे वरिष्ठ वकील भी कोर्ट में मौजूद रहे। मामला संवेदनशील और व्यापक प्रभाव वाला है, इसलिए इसे संविधान पीठ में रखा गया है। आने वाले दिनों में बहस और गहन होगी।