छात्रों से वसूले जा रहे थे अधिक शुल्क, बिना टेंडर आवंटन पर उठे सवाल; शिकायत और आरटीआई के बाद प्रबंधन ने की कार्रवाई
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय, दुर्ग परिसर में संचालित एक छात्र सुविधा केंद्र को विद्यार्थियों की शिकायत और आरटीआई से उठे सवालों के बाद बंद कर दिया गया है। आरोप था कि यह केंद्र तय दरों से अधिक शुल्क लेकर सेवाएं प्रदान कर रहा था और इसे बिना किसी टेंडर प्रक्रिया के चालू किया गया था।
दुर्ग। दुर्ग के हेमचंद यादव विश्वविद्यालय परिसर में पिछले एक वर्ष से संचालित छात्र सुविधा केंद्र अब बंद कर दिया गया है। इस केंद्र पर विद्यार्थियों से निर्धारित दरों से अधिक राशि लेने और दुकान को बिना टेंडर प्रक्रिया के आवंटित करने के आरोप लगे थे।
विश्वविद्यालय परिसर के बाहर पहले से ही कई दुकानें फोटो कॉपी और ऑनलाइन फॉर्म जैसी सेवाएं दे रही थीं, फिर भी परिसर के भीतर अलग से यह सुविधा केंद्र चलाया जा रहा था। जब विद्यार्थियों ने इसकी शिकायत की, तो विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे छात्रों की सुविधा के उद्देश्य से चालू किया गया केंद्र बताया।
इस विषय में जानकारी लेने के लिए एक स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ता ने विश्वविद्यालय और जिला प्रशासन को आरटीआई आवेदन भेजा। दोनों से प्राप्त जानकारी में विसंगतियां सामने आईं। विश्वविद्यालय की ओर से पुराने दस्तावेज भेजे गए, जबकि जिला प्रशासन ने ऐसे किसी केंद्र की जानकारी न होने की बात कही। इसके बाद विश्वविद्यालय प्रबंधन ने तत्काल प्रभाव से इस सुविधा केंद्र को बंद करवा दिया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह दुकान बिना किसी निविदा प्रक्रिया के दी गई थी और इससे होने वाली आय का अनुचित लाभ कुछ अधिकारी ले रहे थे।
विश्वविद्यालय के सहायक कुल सचिव ने सफाई देते हुए कहा कि यह केंद्र छात्रों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए एलएसपीएल (लर्निंग स्पाइरल प्रा.लि.) नामक संस्था के माध्यम से संचालित हो रहा था, जो विश्वविद्यालय से पूर्व से ही जुड़ी हुई है। उन्होंने यह स्वीकार किया कि इसके लिए टेंडर जारी नहीं किया गया था, और यदि शुल्क को लेकर कोई अनियमितता सामने आती है तो उचित कार्रवाई की जाएगी।