इज़राइल-ईरान तनाव और अमेरिका की सैन्य भागीदारी के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार हिला हुआ है, लेकिन भारत ने रणनीतिक रूप से रूस और अमेरिका से तेल आयात बढ़ाकर संभावित आपूर्ति संकट से निपटने की पूरी तैयारी कर ली है।
मध्य पूर्व में छिड़ी इज़राइल-ईरान की लड़ाई और उसमें अमेरिका की एंट्री ने वैश्विक बाजार में हलचल मचा दी है। लेकिन भारत ने स्थिति की गंभीरता को पहले ही भांपते हुए अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक ऐसा मजबूत इंतजाम कर लिया है, जिससे देश में पेट्रोल-डीजल की कोई किल्लत नहीं होगी। भारत ने न सिर्फ रूस और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात बढ़ा दिया है, बल्कि होरमुज़ जलडमरूमध्य से होने वाले जोखिम को लेकर भी वैकल्पिक रणनीति पर काम शुरू कर दिया है।
नई दिल्ली (ए)। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा जरूरतों को लेकर एक सधी हुई रणनीति अपनाई है। इज़राइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष, और अब अमेरिका की इसमें खुली भागीदारी के चलते अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। विशेषज्ञों को आशंका है कि यदि यह युद्ध लंबा चला, तो तेल की आपूर्ति और दाम दोनों पर गहरा असर पड़ेगा।
भारत ने पहले ही बढ़ा दिया था तेल का स्टॉक
हालांकि भारत सरकार ने इस स्थिति की आशंका पहले ही भांप ली थी और पहले से ही तेल आयात बढ़ाकर संकट की तैयारी कर ली थी। जून में भारत ने रूस और अमेरिका से कच्चे तेल का आयात तेजी से बढ़ाया है। ट्रेड एनालिटिक्स फर्म कैपलर के अनुसार, इस महीने भारत ने रूस से प्रतिदिन 20-22 लाख बैरल कच्चा तेल खरीदा है — जो अब तक का सर्वोच्च स्तर है। मई में यह आंकड़ा 19.6 लाख बैरल प्रतिदिन था।
अमेरिका से भी रिकॉर्ड आयात
सिर्फ रूस ही नहीं, बल्कि अमेरिका से भी जून में भारत ने 4.39 लाख बैरल प्रति दिन तेल आयात किया, जो मई में 2.80 लाख बैरल था। यह तेजी दर्शाती है कि भारत ने पश्चिम एशिया में संभावित अस्थिरता को लेकर अपनी रणनीति पहले से तैयार रखी है।
रूस बना भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता
रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने पश्चिमी देशों की तुलना में रूस से सस्ता तेल खरीदना शुरू किया था। इसका असर ये हुआ कि भारत का रूस से तेल आयात कुल आयात का केवल 1% से बढ़कर अब 40% तक पहुंच गया है।
होरमुज़ जलडमरूमध्य बना वैश्विक चिंता का कारण
इज़राइल-ईरान संघर्ष की वजह से होरमुज़ जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर भी चिंताएं बढ़ गई हैं। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल और गैस परिवहन मार्गों में से एक है। भारत इसी मार्ग से लगभग 40% कच्चा तेल और 50% गैस आयात करता है। कैपलर के विशेषज्ञ सुमित रितोलिया के अनुसार, इस जलमार्ग को पूरी तरह बंद करना व्यावहारिक नहीं है। चीन, जो ईरान से सबसे अधिक तेल आयात करता है, और खुद ईरान की 96% तेल आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। ऐसे में ईरान खुद भी इस मार्ग को बंद करके अपना नुकसान नहीं करना चाहेगा।