चीन के साथ समझौते के बाद अमेरिका भारत के साथ ‘बड़ी’ डील को अंतिम रूप देने की तैयारी में, 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य
भारत और अमेरिका के बीच एक महत्वाकांक्षी व्यापार समझौते की दिशा में बड़ी प्रगति हुई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे “बहुत बड़ी डील” करार देते हुए जल्द ही भारत के साथ समझौते की संभावना जताई है। दोनों देशों के बीच यह डील उद्योग, कृषि और टैरिफ मुद्दों पर आधारित है, जिसका उद्देश्य 2030 तक व्यापार को ढाई गुना तक बढ़ाना है।
वाशिंगटन (ए)। व्हाइट हाउस में आयोजित ‘बिग ब्यूटीफुल बिल’ कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने संकेत दिया कि अमेरिका और भारत के बीच जल्द ही एक बड़ी व्यापारिक डील होने जा रही है। उन्होंने कहा, “हमने अभी चीन के साथ ऐतिहासिक डील साइन की है, अब अगली बारी भारत की है।” ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका की टैरिफ नीति से अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और भारत को इस नए समझौते में संतुलित भागीदारी करनी होगी। गौरतलब है कि ट्रम्प प्रशासन ने 2 अप्रैल को भारत पर 26% टैरिफ का ऐलान किया था, जिसे बाद में 90 दिनों के लिए टाल दिया गया। यह समय भारत जैसे देशों को डील पर निर्णय लेने के लिए दिया गया।
ट्रम्प बोले- “अब सब डील करना चाहते हैं”
राष्ट्रपति ट्रम्प ने दावा किया कि दुनियाभर के देश अमेरिका के साथ व्यापारिक समझौते के लिए उत्सुक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका हर देश से डील नहीं करेगा — कुछ को सिर्फ टैरिफ देना होगा।
2030 तक 500 अरब डॉलर व्यापार का लक्ष्य
भारत और अमेरिका के बीच वर्तमान में 190 अरब डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार होता है। नई डील का लक्ष्य 2030 तक इसे 500 अरब डॉलर तक ले जाना है। इसके लिए इंडस्ट्री, कृषि, और टैरिफ में कटौती जैसे क्षेत्रों पर बातचीत हो रही है।
पीयूष गोयल: “डील होगी निष्पक्ष और संतुलित”
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि यह समझौता दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए लाभकारी होगा। फरवरी 2025 में पीएम मोदी और ट्रम्प की मुलाकात में यह सहमति बनी थी कि डील समानता और पारदर्शिता के आधार पर होनी चाहिए।
जयशंकर ने दी स्पष्टता: “डील तभी होगी जब फायदेमंद होगी”
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि भारत किसी भी समझौते में तभी आगे बढ़ेगा जब वह देश के हित में होगा। उन्होंने कहा, “जब तक सब तय नहीं होता, तब तक कुछ भी तय नहीं होता।”
कृषि सेक्टर पर भारत की सख्ती
भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों को अधिक बाजार पहुंच देने के मसले पर सतर्क है। मक्का और सोयाबीन जैसे जीएम फसलों पर अमेरिकी छूट की मांग पर भारत अब तक सहमत नहीं है। भारत चाहता है कि घरेलू किसानों के हितों को नुकसान न हो और डील संतुलित हो।