छत्तीसगढ़ में भांग की व्यावसायिक खेती की मांग पर दायर जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि अदालत सरकार की विधायी और कार्यकारी नीतियों में दखल नहीं दे सकती।
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने भांग की व्यावसायिक खेती की अनुमति मांगने वाली एक जनहित याचिका को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि नीति-निर्धारण राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसमें न्यायालय का हस्तक्षेप उचित नहीं है। कोर्ट ने याचिकाकर्ता पर जनहित की आड़ में निजी लाभ की मंशा का भी संदेह जताया।
छत्तीसगढ़ में भांग की व्यावसायिक खेती को लेकर दायर की गई जनहित याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। याचिका में राज्य सरकार से भांग की खेती को वैध कर व्यावसायिक रूप से बढ़ावा देने की मांग की गई थी। लेकिन छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस बिभु शामिल थे, ने इसे सुनवाई योग्य नहीं माना।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राज्य की विधायी और कार्यकारी नीतियों में दखल देना अदालत के अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। ये नीतिगत निर्णय राज्य सरकार की निर्वाचित शाखाओं द्वारा लिए जाते हैं, और इसमें न्यायपालिका का हस्तक्षेप अनुचित होगा।
बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि जनहित याचिका का उद्देश्य सार्वजनिक हित की रक्षा और संवर्धन होना चाहिए। यदि याचिका में व्यक्तिगत हित छिपा हो, तो उसे जनहित नहीं माना जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता जनहित की आड़ में ऐसा निर्देश मांग रहा था जो सीधे तौर पर राज्य सरकार की नीति से जुड़ा हुआ था, जिसे अदालत नहीं दे सकती।
इस फैसले को लेकर कानूनी विशेषज्ञों का कहना है कि यह निर्णय नीति-निर्धारण की संवैधानिक सीमाओं को रेखांकित करता है, जहां जनहित याचिका का उपयोग निजी हितों के लिए नहीं किया जा सकता।