भाषा और गणित दोनों में कमजोर प्रदर्शन; ग्रामीण बच्चे शहरी बच्चों से बेहतर, सरकारी स्कूल निजी स्कूलों से आगे
कक्षा 3 से 9 तक के छात्रों की पढ़ाई की गुणवत्ता पर केंद्र सरकार की रिपोर्ट ‘परख’ ने छत्तीसगढ़ की शिक्षा व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के मुताबिक राज्य के बच्चे बुनियादी गणित और भाषा कौशल में पिछड़ रहे हैं, जिससे शिक्षा की नींव पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।
रायपुर। शिक्षा मंत्रालय की ताज़ा रिपोर्ट ‘परख’ के मुताबिक छत्तीसगढ़ के लगभग 50% बच्चे कक्षा 3 तक आते-आते 2 से 10 तक का पहाड़ा तक नहीं जानते। वहीं, 45% बच्चे 1 से 99 तक की गिनती को बढ़ते या घटते क्रम में लगाने में भी असमर्थ हैं। इससे राज्य में प्राथमिक शिक्षा की हालत पर गहरा सवाल खड़ा हो गया है।
रिपोर्ट के अनुसार अनुसूचित जाति (SC) वर्ग के बच्चे भाषा, गणित और आस-पास की दुनिया को समझने में अन्य सामाजिक वर्गों की तुलना में पिछड़े हैं। वहीं, दिलचस्प बात यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चे भाषा और गणित में शहरी बच्चों से बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। यही नहीं, सरकारी स्कूलों के विद्यार्थी इन विषयों में निजी स्कूलों के बच्चों से भी आगे हैं।
रायपुर समेत कई जिले शिक्षा गुणवत्ता में फिसड्डी
रिपोर्ट में रायपुर को देश के तीसरी कक्षा के टॉप 50 लो-परफॉर्मिंग शहरों में शामिल किया गया है। रायपुर 26वें नंबर पर है, जबकि सुकमा 10वें, नारायणपुर 20वें और कोंडागांव 45वें स्थान पर हैं। यह आंकड़े स्पष्ट रूप से दिखाते हैं कि प्रदेश में बुनियादी शिक्षा की गुणवत्ता कई जिलों में चिंताजनक स्तर पर है।
ग्रामीण बच्चों की पकड़ बेहतर
रिपोर्ट यह भी बताती है कि गांव के बच्चे भाषा को बेहतर समझते हैं, तेजी से कैलकुलेशन करते हैं और अपने परिवेश को लेकर ज्यादा सजग हैं। यह अंतर खासतौर पर शहरी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की तुलना में अधिक स्पष्ट रूप से नजर आया।