“ADG/IG रैंक के अधिकारी को मिलेगा कमान, 62 अफसरों का होगा सेटअप; पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो बिलासपुर-दुर्ग में भी लागू”
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर छत्तीसगढ़ में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू करने का ऐलान किया। शुरुआत रायपुर से होगी, जहां अपराध के बढ़ते मामलों पर अंकुश लगाने के लिए ADG/IG रैंक के अधिकारी को कमान सौंपी जाएगी। 62 अधिकारियों के सेटअप के साथ यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो इसे अन्य बड़े जिलों में भी लागू किया जाएगा।
रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने स्वतंत्रता दिवस पर ऐलान किया कि छत्तीसगढ़ में पुलिस कमिश्नर प्रणाली लागू की जाएगी। इस प्रणाली की शुरुआत राजधानी रायपुर से होगी, जहां अपराध के बढ़ते ग्राफ ने कानून-व्यवस्था के लिए नई चुनौती खड़ी की है।
पुलिस महकमे के अनुसार, कमिश्नर प्रणाली के तहत ADG/IG रैंक का पुलिस आयुक्त नियुक्त होगा, जिसे दंड प्रक्रिया संहिता के तहत स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्तियां मिलेंगी। 62 अफसरों के इस सेटअप में एक डीआईजी, तीन एसपी, पांच एएसपी, 16–17 डीएसपी, 10 इंस्पेक्टर और अन्य रैंक के अधिकारी शामिल होंगे।

नई व्यवस्था में पुलिस आयुक्त को प्रतिबंधात्मक आदेश जारी करने से लेकर गैंगस्टर एक्ट और रासुका जैसे कठोर कानून लगाने तक के अधिकार सीधे मिल जाएंगे। अब तक कलेक्टर की अनुमति से होने वाले कई प्रशासनिक और कानून-व्यवस्था संबंधी निर्णय पुलिस स्तर पर ही निपटाए जा सकेंगे।
प्रदेश सरकार का मानना है कि इससे आपराधिक गतिविधियों पर तेजी से नियंत्रण किया जा सकेगा। होटल, बार और हथियार लाइसेंस, धरना-प्रदर्शन की अनुमति, दंगे में बल प्रयोग और भूमि विवाद जैसे मुद्दों पर भी पुलिस कमिश्नर खुद निर्णय ले सकेंगे।
रायपुर में जनवरी से अब तक 6 हजार से ज्यादा अपराध दर्ज हो चुके हैं, जिनमें 50 से अधिक हत्याएं और 65 से अधिक चाकूबाजी की घटनाएं शामिल हैं। ऐसे में सरकार को उम्मीद है कि कमिश्नर प्रणाली अपराध नियंत्रण के लिए एक कारगर कदम साबित होगी।