खाद और कृषि उपकरण कारोबारियों पर शिकंजा, करोड़ों के माइनिंग फंड घोटाले में वित्तीय गड़बड़ी की जांच तेज
छत्तीसगढ़ में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मंगलवार तड़के राजधानी रायपुर सहित दुर्ग और भिलाई में कई ठिकानों पर एक साथ दबिश दी। यह कार्रवाई DMF घोटाले से जुड़ी बताई जा रही है। कृषि कारोबारियों के घरों और दफ्तरों से वित्तीय लेन-देन से जुड़े दस्तावेज खंगाले जा रहे हैं।
रायपुर। छत्तीसगढ़ में DMF घोटाले की जांच अब नए मोड़ पर पहुंच गई है। रायपुर के शंकर नगर स्थित खाद कारोबारी विनय गर्ग, लॉ विस्टा कॉलोनी में कृषि उपकरण और पेस्टिसाइड सप्लायर पवन पोद्दार और सतपाल छाबड़ा के घर मंगलवार सुबह ED की टीम ने दबिश दी। अफसरों ने यहां कई घंटे तक कागजात खंगाले।
इसी कड़ी में भिलाई-3 स्थित अन्न भूमि ग्रीन टेक प्राइवेट लिमिटेड के डायरेक्टर शिवकुमार मोदी के आवास पर भी छापा पड़ा। यहां 6 से अधिक अधिकारी दस्तावेजों की जांच में जुटे हैं। छापे के दौरान सुरक्षा के लिए CRPF की टीम तैनात की गई है।
जानकारी के अनुसार यह कंपनी कृषि और इंफ्रास्ट्रक्चर के क्षेत्र में काम करती है, जिसमें ड्रिप सिंचाई सिस्टम, सौर जल पंप, आरसीसी पोल, कांटेदार तार और कृषि उपकरण सप्लाई शामिल है। आरोप है कि सरकारी टेंडरों में हेरफेर कर करोड़ों रुपए का लाभ उठाया गया।
छत्तीसगढ़ सरकार ने बताया कि ED की रिपोर्ट के आधार पर EOW ने 120 बी और 420 IPC के तहत केस दर्ज किया है। जांच में सामने आया है कि डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) के पैसों का दुरुपयोग कर अधिकारियों और बिचौलियों को भारी कमीशन पहुंचाया गया। टेंडर प्रक्रिया में हेरफेर कर 575 करोड़ रुपए से ज्यादा का घोटाला किया गया।
इस घोटाले में कई नामचीन कारोबारी, ठेकेदार और अधिकारी शामिल बताए जा रहे हैं। कलेक्टर को 40%, सीईओ को 5%, एसडीओ को 3% और सब इंजीनियर को 2% कमीशन मिलने का खुलासा हुआ है।