Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने घर जलाए, अंतरिम पीएम सुशीला कार्की पर टिकी निगाहें; ओली पर FIR दर्ज, हालात धीरे-धीरे सामान्य
नेपाल में जारी राजनीतिक अस्थिरता और हिंसा के बीच पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और प्रचंड बेघर हो गए हैं। 9 सितंबर को Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने उनके आवासों में आग लगा दी थी। फिलहाल तीनों नेता सेना की सुरक्षा में कैंपों में रह रहे हैं और समर्थक उनके लिए अस्थायी मकान तलाश रहे हैं। इस बीच अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की के नेतृत्व में नई सरकार का गठन टल गया है, जबकि राजधानी काठमांडू में हालात धीरे-धीरे सामान्य हो रहे हैं।
काठमांडू (ए)। नेपाल में राजनीतिक संकट गहराता जा रहा है। बीते सप्ताह राजधानी काठमांडू में भड़की हिंसा ने सत्ता संतुलन को पूरी तरह हिला दिया है। Gen-Z प्रदर्शनकारियों ने 9 सितंबर को पूर्व प्रधानमंत्रियों केपी शर्मा ओली, शेर बहादुर देउबा और पुष्पकमल दहल प्रचंड के घरों में आग लगा दी, जिसके बाद ये नेता सेना की सुरक्षा में कैंपों में शरण लेने को मजबूर हैं।
समर्थक अब नेताओं के लिए किराए के घर ढूंढ रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि ये नेता काठमांडू से दूर पोखरा जैसे शहरों में कुछ समय बिताना चाहते हैं, ताकि प्रदर्शनकारियों के आक्रोश से बचा जा सके।
इस बीच राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने संसद भंग करने की घोषणा कर दी, जिस पर कम्युनिस्ट पार्टी UML ने विरोध जताते हुए सड़कों पर उतरने का आह्वान किया है। वहीं, Gen-Z संगठनों का कहना है कि वे सत्ता में शामिल नहीं होंगे, बल्कि सरकार के कामकाज की निगरानी करेंगे।
अंतरिम प्रधानमंत्री सुशीला कार्की ने शुक्रवार को शपथ ली थी, लेकिन उनकी कैबिनेट का विस्तार फिलहाल टल गया है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनकी नियुक्ति को महिला सशक्तिकरण का प्रतीक बताते हुए नेपाल के लोकतंत्र और पुनर्निर्माण में सहयोग का भरोसा दिलाया है।
6 दिनों की हिंसा के बाद राजधानी में कर्फ्यू आंशिक रूप से हटाया गया है और पब्लिक ट्रांसपोर्ट व भारत-नेपाल सीमा पर आवाजाही शुरू हो चुकी है। हालांकि, कई इलाकों में अब भी सख्ती जारी है और दो महीने तक धरना-प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।