सीपीडब्ल्यूडी ने निविदा जारी की, चार माह में पूरा होगा काम, सीसीटीवी से लेकर फाइबर ऑप्टिक घुसपैठ पहचान प्रणाली तक होंगे इंतज़ाम
संसद भवन की सुरक्षा को और अधिक अभेद्य बनाने की कवायद शुरू हो गई है। केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) 14.64 करोड़ की लागत से यहां अत्याधुनिक सुरक्षा तंत्र स्थापित करेगा। इसमें इलेक्ट्रिक बाड़, फाइबर ऑप्टिक घुसपैठ पहचान प्रणाली (पीआईडीएस), एकीकृत सीसीटीवी नेटवर्क और केंद्रीकृत वीडियो प्रबंधन प्रणाली शामिल होगी। इसके लिए सीपीडब्ल्यूडी ने निविदा जारी कर दी है और 18 सितंबर तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं।
नई दिल्ली (ए)। संसद भवन की सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) ने बड़ा कदम उठाया है। विभाग 14.64 करोड़ रुपए की लागत से परिसर में अत्याधुनिक सुरक्षा उपकरण लगाएगा। इसके तहत मौजूदा इलेक्ट्रिक फेंसिंग हटाकर नई इलेक्ट्रिक बाड़, ऑप्टिकल फाइबर आधारित घुसपैठ पहचान प्रणाली, परिधि रोशनी के साथ एकीकृत सीसीटीवी निगरानी नेटवर्क और केंद्रीकृत वीडियो प्रबंधन प्रणाली (वीएमएस) स्थापित की जाएगी।
परियोजना से जुड़े निविदा दस्तावेज में कहा गया है कि सभी सिस्टम आपस में पूरी तरह एकीकृत होंगे और एक से अधिक घुसपैठ के मामलों की पहचान करने में सक्षम होंगे। यह काम परियोजना शुरू होने की तारीख से चार महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य है।
कार्यदायी संस्था को न सिर्फ नए उपकरण लगाने होंगे, बल्कि आवश्यक नींव, केबलिंग, मिट्टी का काम और खंभों/पोस्टों की आपूर्ति, स्थापना, परीक्षण और कमीशनिंग भी करनी होगी। सभी डिजाइन को पहले पीएसएस/सीपीडब्ल्यूडी से अनुमोदित कराना होगा। संसद में गणमान्य व्यक्तियों का लगातार आना-जाना रहता है, इसलिए काम इस तरह किया जाएगा कि वहां की गतिविधियों में कोई बाधा न आए। निविदा शर्तों में कहा गया है कि फेंसिंग के लिए जंग-रहित जीआई तारों का इस्तेमाल होगा और सुरक्षा बढ़ाने के लिए ऑडियो हूटर भी लगाए जाएंगे, जिनकी ध्वनि 85 डीबी से कम नहीं होगी।
सीपीडब्ल्यूडी ने स्पष्ट किया है कि संसद परिसर उच्च सुरक्षा क्षेत्र है, इसलिए कभी-कभी काम के घंटों और दिनों पर पाबंदी लग सकती है। ऐसे हालात में कार्यदायी संस्था को अतिरिक्त संसाधनों की व्यवस्था करके समय की भरपाई करनी होगी। गौरतलब है कि पिछले महीने एक 20 वर्षीय युवक संसद भवन की दीवार फांदने की कोशिश करते पकड़ा गया था। इस घटना के बाद सुरक्षा को और चाक-चौबंद बनाने की कवायद तेज हो गई है।