सूर्यघर योजना से लाखों घर होंगे रोशन, किसानों को मिल रहे सोलर पंप, 2027 तक पाँच लाख घरों में सोलर पैनल लगाने का लक्ष्य
ऊर्जा संकट और जलवायु परिवर्तन जैसी वैश्विक चुनौतियों के बीच छत्तीसगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में नए आयाम गढ़ रहा है। राज्य तेजी से सौर ऊर्जा को अपनाकर न केवल स्वच्छ और सस्ती बिजली उपलब्ध करा रहा है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण संरक्षण में भी बड़ी भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना, कुसुम योजना और मिनी ग्रिड परियोजनाओं के जरिये छत्तीसगढ़ अक्षय ऊर्जा का राष्ट्रीय मॉडल बनने की ओर अग्रसर है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल कर रहा है। सौर ऊर्जा पर केंद्रित विभिन्न योजनाओं ने इसे नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन में अग्रणी बनाने की दिशा में मजबूत आधार दिया है।
प्रधानमंत्री सूर्यघर मुफ्त बिजली योजना के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में अब तक 55 हजार से अधिक उपभोक्ताओं ने आवेदन किया है। इनमें पाँच हजार घरों में सौर प्रणाली स्थापित हो चुकी है, जबकि 16 हजार घरों में काम प्रगति पर है। राज्य सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक पाँच लाख घरों को सोलर ऊर्जा से रोशन करने का है।
किसानों के लिए प्रधानमंत्री कुसुम योजना जीवनदायिनी साबित हो रही है। इसके तहत सोलर पंपों की स्थापना से सिंचाई आसान हो रही है और पारंपरिक बिजली पर निर्भरता घट रही है। अब तक सात मेगावॉट क्षमता के पंप स्थापित किए जा चुके हैं।
दुर्गम इलाकों में सोलर मिनी ग्रिड योजना लागू की जा रही है, जिससे हजारों गाँवों तक रोशनी पहुँचेगी। साथ ही सरकारी भवनों, छात्रावासों और अस्पतालों में सोलर विद्युतीकरण तेजी से बढ़ रहा है। अब तक 2,600 से अधिक परिसरों में सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं।
राजनांदगांव जिले में देश का सबसे बड़ा बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम स्थापित किया गया है, जो प्रतिदिन 5 लाख यूनिट से अधिक बिजली उत्पन्न करेगा और सालाना 4.5 लाख मीट्रिक टन कार्बन उत्सर्जन घटाएगा। इसके अलावा 2000 मेगावॉट क्षमता के सोलर पार्क बनाने की तैयारी भी चल रही है।
“सोलर विलेज” की अवधारणा भी छत्तीसगढ़ को अलग पहचान दिला रही है। इसके तहत चुने गए 53 गाँव केवल सौर ऊर्जा से संचालित होंगे। इससे ग्रामीण जीवन में स्थायी बदलाव आएगा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।
वर्तमान में राज्य की बिजली मांग का 15 प्रतिशत हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से पूरा हो रहा है। वर्ष 2030 तक इसे 45 प्रतिशत और 2047 तक 66 प्रतिशत तक पहुँचाने का लक्ष्य तय किया गया है। इन प्रयासों से छत्तीसगढ़ नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में देश के प्रमुख राज्यों में शुमार होगा।