नालंदा जिले के एकंगरसराय स्थित औंगारी धाम द्वापर युग से सूर्योपासना का केंद्र माना जाता है — मान्यता है, यहीं भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र राजा शाम्ब ने सूर्य देव की आराधना कर कुष्ठ रोग से मुक्ति पाई थी
नालंदा की पावन धरती पर स्थित औंगारी धाम सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, इतिहास और चमत्कार का जीवंत प्रतीक है। द्वापर युग से चली आ रही परंपराओं के बीच यह स्थान आज भी सूर्योपासना का प्रमुख केंद्र है। इसकी सबसे अद्भुत विशेषता यह है कि यहां का सूर्य मंदिर देश में एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसका मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की ओर खुलता है।
जहानाबाद (ए)। बिहार के नालंदा जिले के एकंगरसराय प्रखंड में स्थित औंगारी धाम को सूर्य उपासना का सबसे प्राचीन और चमत्कारिक केंद्र माना जाता है। यहां स्थित सूर्य मंदिर की वास्तुकला और पौराणिक कथा दोनों ही इसे विशिष्ट बनाते हैं।
मान्यता है कि भगवान श्रीकृष्ण के पौत्र राजा शाम्ब को कुष्ठ रोग हो गया था। रोगमुक्त होने के लिए उन्होंने औंगारी में सूर्य देव की कठोर तपस्या की थी। उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर सूर्य देव ने उन्हें आरोग्य का वरदान दिया। उसी स्थान पर उन्होंने सूर्य मंदिर और तालाब का निर्माण कराया, जो आज भी श्रद्धा का केंद्र है।
औंगारी धाम ट्रस्ट के सदस्य एस.के. पांडेय के अनुसार, “यह मंदिर द्वापर कालीन है और बिहार सरकार द्वारा प्रमाणित धार्मिक धरोहरों में शामिल है। यहां आने वाले श्रद्धालु वंश वृद्धि और रोग मुक्ति की मनोकामना लेकर सूर्य भगवान की पूजा करते हैं।”
🌞 पश्चिममुखी मंदिर की अनोखी कथा
मंदिर के पुजारी विवेक पांडेय और सौरव पांडेय बताते हैं कि देश में यह एकमात्र सूर्य मंदिर है, जिसका मुख्य द्वार पश्चिम दिशा में खुलता है। कथा के अनुसार, मुगल बादशाह औरंगज़ेब के शासनकाल में मंदिर को ध्वस्त करने का आदेश दिया गया था। उसके सेनापति ने मंदिर की शक्ति को चुनौती देते हुए कहा कि “यदि इसमें सचमुच कोई दिव्यता है तो इसका द्वार स्वयं घूम जाए।”
कहा जाता है, उसी क्षण मंदिर का द्वार पूरब से पश्चिम दिशा में परिवर्तित हो गया — और आज तक वहीं स्थिति में है।
🔆 12 सूर्यपीठों में एक औंगारी धाम
औंगारी धाम देश के 12 प्रमुख सूर्यपीठों में गिना जाता है। छठ पर्व के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं। उस समय मंदिर परिसर में पांव रखने तक की जगह नहीं रहती। हर रविवार यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से प्रार्थना करने पर निसंतान को संतान और रोगी को आरोग्य की प्राप्ति होती है।
🪔 आस्था के साथ आजीविका का केंद्र
औंगारी धाम न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका का भी प्रमुख स्रोत है। करीब 300 से अधिक परिवार इस मंदिर से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हैं — कोई पुजारी है, कोई फूल-प्रसाद विक्रेता, तो कोई पर्व-त्योहारों की तैयारियों में सहयोगी।
औंगारी धाम: सूर्य उपासना की जीवंत परंपरा
आज भी जब सुबह की पहली किरण मंदिर के शिखर पर पड़ती है, तो श्रद्धालुओं की भीड़ ‘जय सूर्य नारायण’ के जयघोष से वातावरण गूंजा देती है। द्वापर युग से चला आ रहा यह स्थल न केवल बिहार, बल्कि पूरे भारत की सूर्य संस्कृति का साक्षात प्रतीक बना हुआ है।